मोदी का विपक्ष पर तीखा प्रहार — “छठ पूजा का अपमान बिहार कभी नहीं सहेगा”

मुजफ्फरपुर और छपरा की सभाओं में बोले प्रधानमंत्री, कहा — आरजेडी-कांग्रेस की पहचान कट्टा, करप्शन और कुशासन

मुजफ्फरपुर/छपरा, 31 अक्टूबर 2025 — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के प्रचार के दौरान विपक्ष पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि छठ पूजा को ‘ड्रामा-नौटंकी’ बताने वाले बिहार की आस्था का अपमान कर रहे हैं, और बिहार की जनता इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।

मोतीपुर चीनी मिल मैदान (मुजफ्फरपुर) और छपरा के हवाई अड्डा मैदान में आयोजित जनसभाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “छठ पूजा हमारी माताओं-बहनों की तपस्या और आस्था का प्रतीक है। इसे नौटंकी कहने वालों को बिहार माफ नहीं करेगा। निर्जला व्रत रखने वाली माताएं और छठी मैया में श्रद्धा रखने वाले लोग इस अपमान का जवाब देंगे।”

मोदी ने कहा कि एनडीए सरकार छठ पूजा को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल कराने के प्रयास में है, ताकि दुनिया इस पर्व की ममता, समरसता और सामाजिक एकता को पहचान सके। उन्होंने यह भी घोषणा की कि छठ गीतों और परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए देशभर में प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी, जिनके विजेताओं को सरकार पुरस्कृत करेगी।

प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “क्या आपने कभी राजद या कांग्रेस के नेताओं को राम मंदिर जाते देखा है? उन्हें डर है कि अगर अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन कर लेंगे तो उनका वोट बैंक नाराज हो जाएगा। जो आपकी आस्था का सम्मान नहीं कर सकते, वो आस्था के स्थलों का विकास क्या करेंगे?”

मोदी ने आरजेडी की “पांच पहचानें” गिनाईं — कट्टा, क्रूरता, कटुता, करप्शन और कुशासन। उन्होंने कहा, “जहां क्रूरता का राज होता है, वहां कानून दम तोड़ देता है। कटुता बढ़ाने वालों से समाज में सद्भाव नहीं रह सकता। कुशासन में विकास नहीं होता और करप्शन से न्याय की हत्या होती है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी सर्वे यह संकेत दे रहे हैं कि इस बार आरजेडी-कांग्रेस को अब तक की सबसे कम सीटें मिलने जा रही हैं, जबकि एनडीए को ऐतिहासिक जीत हासिल होगी। “बिहार फिर से सुशासन और समृद्धि का प्रतीक बनेगा,” उन्होंने कहा।

विपक्ष के प्रचार पर तंज कसते हुए मोदी बोले, “बेशर्मी और हिम्मत देखिए, इनके प्रचार गीतों में भी ‘छर्रा, कट्टा और दोनाली’ की बातें हो रही हैं। यह इनके संस्कार और सोच का प्रतिबिंब है।”


 

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