नई दिल्ली: लोकसभा में सोमवार को वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism) पर सरकार का सबसे बड़ा और सीधा बयान सामने आया। केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि मोदी सरकार की सख्त नीति और राज्य सरकारों के साथ संयुक्त अभियान के कारण नक्सलवाद अब अंतिम साँसें गिन रहा है और मार्च 2026 तक इसका पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा।
नक्सलियों को संविधान, लोकतंत्र पर भरोसा नहीं – नित्यानंद राय
लोकसभा में तारांकित प्रश्न संख्या 122 के जवाब में मंत्री नित्यानंद राय ने कहा—
“वामपंथी उग्रवादी न तो भारत के संविधान में विश्वास रखते हैं, न लोकतांत्रिक व्यवस्था में। उन्होंने हजारों निर्दोष नागरिकों की हत्या की, हजारों परिवार उजाड़े। ऐसे संगठनों के प्रति सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।”
कभी नेपाल से आंध्र तक “रेड कॉरिडोर”, अब सिमटकर कुछ जिलों तक
मंत्री ने बताया कि
- 1967 से चली आ रही नक्सलवाद की समस्या
- 2010 तक सबसे भयावह स्वरूप में
- लेकिन मोदी सरकार की सख्त नीति से अब सिर्फ हाथभर का क्षेत्र बचा है।
उन्होंने दावा किया कि—
“एक समय पशुपतिनाथ से तिरुपति तक पूरा क्षेत्र रेड कॉरिडोर कहलाता था। अब यह खत्म होने के कगार पर है।”
मोदी सरकार ने पहली बार किसी केंद्र सरकार की तरह ठोस नीति बनाई
राय ने कहा कि पिछली सरकारें नक्सलवाद को सिर्फ “राज्य की समस्या” मानती थीं।
लेकिन मोदी सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते हुए समग्र रणनीति बनाई।
सरकार के बड़े कदम (2015 से अब तक)
1. सुरक्षा बलों की तैनाती– 574 कंपनियां LWE क्षेत्र में
2. बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता
- SRE योजना: ₹3523 करोड़
- अवसंरचना योजना: ₹1757 करोड़
- विशेष सहायता: ₹3848 करोड़
- ACALWEMS: ₹1218 करोड़
3. पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत
- 706 फोर्टिफाइड थाने
- CRPF की बस्तरिया बटालियन
- प्रशिक्षण और हथियारों का सुदृढ़ीकरण
4. सड़क, संचार और विकास कार्य
- 17,573 किमी सड़क (85% पूर्ण)
- 10,651 मोबाइल टावर
- 46 ITI, 49 कौशल केंद्र
- 11 केन्द्रीय विद्यालय, 258 एकलव्य विद्यालय
- 6,025 डाकघर, 1,804 बैंक शाखाएँ
सरकार के दावों के अनुसार नतीजे बेहद प्रभावी
2010 की तुलना में 2024 में हिंसा में 81% कमी
| श्रेणी | 2004–14 | 2015–25 | कमी |
|---|---|---|---|
| हिंसा की घटनाएँ | 16,135 | 7,134 | 56% |
| नागरिक मौत | 4,684 | 1,404 | 70% |
| सुरक्षा बल मौत | 1,824 | 464 | 75% |
2014 की तुलना में अब —
- प्रभावित राज्य: 10 से घटकर 5
- प्रभावित जिले: 126 से घटकर 11
- प्रभावित थाना क्षेत्र: 465 से घटकर 106
आत्मसमर्पण में तेजी
2014 से अब तक 9,588 नक्सली आत्मसमर्पण,
सिर्फ 2025 में 2,167 आत्मसमर्पण – यह सबसे बड़ा रिकॉर्ड बताया गया।
सरेंडर करने वालों को क्या मिलता है? सरकार की पुनर्वास नीति
नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर सुविधाएँ शुरू की हैं—
- उच्च कैडर को ₹5 लाख
- अन्य कैडर को ₹2.5 लाख
- हथियार के साथ सरेंडर पर अतिरिक्त प्रोत्साहन
- 3 वर्ष तक ₹10,000 मासिक वजीफा
- बच्चों को मुफ्त शिक्षा, छात्रवृत्ति
- महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण और रोजगार
- अपंग/घायल को मुफ्त इलाज, भूमि और रोजगार सहायता
राय ने कहा—
“हमारी पुनर्वास नीति का असर है कि हजारों उग्रवादी हथियार छोड़ चुके हैं और मुख्यधारा में लौट आए हैं।”
सरकार का अंतिम लक्ष्य: मार्च 2026 तक पूरी तरह नक्सल-समाप्ति
गृह राज्य मंत्री ने लोकसभा में कहा—
“अब नक्सलियों की ताकत खत्म हो गई है। उनकी लड़ने की क्षमता क्षीण हो चुकी है।
मार्च 2026 तक वामपंथी उग्रवाद का देश से पूर्ण सफाया हो जाएगा।”


