मिथिलांचल के किसानों की खुलेगी किस्मत: सकरी और रैयाम में स्थापित होंगी नई चीनी मिलें; को-ऑपरेटिव मॉडल से होगा बंद पड़ी मिलों का कायाकल्प

पटना | 11 फरवरी

​बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों के दिन अब बहुरने वाले हैं। राज्य सरकार ने गन्ना किसानों की आमदनी बढ़ाने और उद्योग को रफ्तार देने के लिए एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। बुधवार को विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में फैसला लिया गया है कि मधुबनी के सकरी और दरभंगा के रैयाम में सहकारी (Co-operative) मॉडल पर नई चीनी मिलें स्थापित की जाएंगी।

खबर की 3 सबसे बड़ी बातें:

  • मिथिलांचल पर फोकस: विकास आयुक्त ने सकरी और रैयाम में चीनी मिलों की स्थापना प्रक्रिया को तेज करने का सख्त निर्देश दिया है।
  • DPR तैयार करेगा NFCSF: राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ (NFCSF) जल्द ही इन मिलों के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) सौंपेगा।
  • गन्ना उत्पादन बढ़ाने पर जोर: मिलों को गन्ने की कमी न हो, इसके लिए बसंतकालीन और शरदकालीन बुआई बढ़ाने और जल-जमाव रोकने पर रणनीति बनी है।

को-ऑपरेटिव-कम-प्राइवेट मॉडल पर होगा काम

​बैठक में राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लिमिटेड (NFCSF), नई दिल्ली और इंडियन पोटाश लिमिटेड के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। NFCSF के प्रबंध निदेशक ने बिहार सरकार के इस विजन की सराहना करते हुए नई मिलों की स्थापना में हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।

वहीं, इंडियन पोटाश लिमिटेड के क्षेत्रीय प्रबंधक ने एक नया और व्यावहारिक प्रस्ताव रखते हुए कहा कि राज्य में सहकारी-सह-निजी (Co-operative-cum-Private) मॉडल के तहत चीनी मिलों को स्थापित करना सबसे ज्यादा फायदेमंद रहेगा। इससे किसानों और उद्यमियों दोनों को सीधा लाभ मिलेगा।

सकरी और रैयाम के लिए अधिकारियों को मिला ‘टास्क’

​विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने अधिकारियों को दो-टूक निर्देश दिया है कि मधुबनी के सकरी और दरभंगा के रैयाम में मिलों की स्थापना सरकार की प्राथमिकता में है। उन्होंने सहकारिता विभाग के सचिव को NFCSF के साथ तुरंत समन्वय (Coordination) स्थापित कर आवश्यक कागजी और जमीनी कार्रवाई तेज करने को कहा है।

जल-जमाव से निजात और गन्ने की पैदावार बढ़ाने का मास्टरप्लान

​सिर्फ मिलें खोलना ही काफी नहीं है, उनके लिए कच्चा माल (गन्ना) भी चाहिए। इसे ध्यान में रखते हुए बैठक में तय किया गया कि बसंत और शरद ऋतु के बुआई सत्र में गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा, बारिश के दिनों में खेतों में होने वाले जल-जमाव की समस्या से निपटने का भी रोडमैप तैयार किया जा रहा है, ताकि मिलों को निर्बाध रूप से गन्ने की आपूर्ति होती रहे।

बैठक में इन दिग्गजों की रही मौजूदगी:

इस अहम बैठक में गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार, योजना एवं विकास विभाग के प्रधान सचिव मयंक वरवडे, सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह, लघु जल संसाधन विभाग के सचिव बी. कार्तिकेय धनजी और गन्ना आयुक्त अनिल कुमार झा सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

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