मघड़ा शीतला मंदिर में आस्था पर भारी पड़ी बदइंतजामी: अपनों को बचाने में टूटी मां की सांसें, नालंदा की गलियों में पसरा मातम

नालंदा (द वॉयस ऑफ बिहार)।​नालंदा जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र स्थित मघड़ा के प्रसिद्ध शीतला मंदिर में मंगलवार की सुबह जो कुछ भी हुआ, उसने आस्था के उल्लास को उम्र भर के मातम में बदल दिया। चंद मिनटों की अव्यवस्था और भीड़ के अनियंत्रित दबाव ने आठ परिवारों के चिराग बुझा दिए। यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक तंत्र की विफलता की कहानी है, जो वीवीआईपी (VVIP) ड्यूटी में इतना मशगूल था कि आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई। मंदिर परिसर से लेकर बिहारशरीफ के सदर अस्पताल तक, हर ओर केवल चीख-पुकार, विलाप और व्यवस्था के प्रति आक्रोश का माहौल था।

​”तुम जाओ बेटी, हम नहीं बचेंगे…”—एक मां का आखिरी बलिदान

​सदर अस्पताल के गलियारे में 12 बजे के आसपास एक ऐसा दृश्य दिखा जिसने पत्थर दिल इंसान को भी रुला दिया। रहुई प्रखंड की बेबी देवी बदहवास हालत में फर्श पर बैठी थीं। उनकी आंखों के आंसू सूख चुके थे, लेकिन उनकी जुबान पर केवल अपनी मां की आखिरी बातें थीं। बेबी देवी ने रोते हुए बताया कि वे लोग परिवार के साथ तिलकोत्सव की गाड़ी की पूजा कराने मंदिर आए थे। खुशी का माहौल था, लेकिन अचानक भीड़ का सैलाब आया।

​भीड़ का दबाव इतना बढ़ा कि लोग एक-दूसरे को रौंदने लगे। बेबी ने बताया, “भीड़ मुझे कुचल देती, लेकिन मां ने अपनी जान की परवाह नहीं की। उन्होंने मुझे पूरी ताकत से धक्का देकर सीढ़ियों की तरफ बाहर निकाल दिया। उनकी सांसें उखड़ रही थीं, उन्होंने बस इतना कहा—’जाओ बेटी, हम नहीं बचेंगे’ और फिर वे भीड़ के समुद्र में समा गईं।” यह कहानी उस ममता की है जिसने मौत के सामने भी हार नहीं मानी, लेकिन व्यवस्था की लापरवाही ने उस ममता को हमेशा के लिए खामोश कर दिया।

​बांस की बैरिकेडिंग बनी काल: प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा

​हादसे के पीछे की वजहों को लेकर स्थानीय लोगों और चश्मदीदों में भारी उबाल है। रहुई के विशुनपुर निवासी सुबोध कुमार ने बताया कि मंदिर में भीड़ प्रबंधन के नाम पर केवल बांस की कमजोर बैरिकेडिंग थी, जो भीड़ का दबाव नहीं झेल सकी। लोग एक-दूसरे पर गिरते गए और नीचे दबने वालों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पटना से आई रीता देवी ने बताया कि वे चार सहेलियां साथ थीं, लेकिन भगदड़ ने सबको अलग-थलग कर दिया।

​मघड़ा के स्थानीय निवासियों का कहना है कि मौतों की एक बड़ी वजह दम घुटना भी है। मंदिर परिसर में वेंटिलेशन और निकास के रास्ते बेहद संकरे थे। वहीं, सबसे बड़ा आरोप यह लग रहा है कि जिस वक्त मंदिर में हजारों की भीड़ उमड़ रही थी, जिला प्रशासन और पुलिस का पूरा महकमा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के राजगीर आगमन की सुरक्षा में तैनात था। आस्था के इस बड़े केंद्र को महज चंद पुलिसकर्मियों के भरोसे छोड़ दिया गया था।

​हादसे में अपनी जान गंवाने वाली आठ महिलाएं

​भगदड़ में दम तोड़ने वाली सभी आठों मृतक महिलाएं थीं। पोस्टमार्टम के बाद जब उनके शव गांवों में पहुंचे, तो पूरे इलाके में कोहराम मच गया। मृतकों की सूची इस प्रकार है:

  • देवंती देवी (48): मुजफ्फरा, इस्लामपुर
  • मालो देवी (35): अरपा-गौरा, हिलसा
  • क्रिंता देवी (48): विशुनपुर, रहुई
  • रीता देवी (45): सकुनत कला, बिहारशरीफ
  • कांति देवी (45): दीपनगर, बिहारशरीफ
  • रेखा देवी (55): मथुरापुर, नूरसराय
  • गुड़िया देवी (35): सालूगंज, नूरसराय
  • आशा देवी (65): कुंभी, वारिसलीगंज

​नूरसराय के मथुरापुर निवासी रेखा देवी की मौत ने उनके पांच बच्चों (तीन बेटियां और दो बेटे) के सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठा दिया। अस्पताल में मासूमों को अपनी मां के शव से लिपटकर रोते देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं।

​राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री ने जताया शोक, 6 लाख के मुआवजे का एलान

​इस हृदयविदारक घटना पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि नालंदा में श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

​इधर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी घटना पर गहरा दुख प्रकट किया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के आश्रितों को आपदा प्रबंधन विभाग से 4 लाख रुपये और मुख्यमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये यानी कुल 6 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि देने का निर्देश दिया है। उन्होंने वरीय अधिकारियों को मौके पर कैंप करने और घायलों का समुचित इलाज सुनिश्चित करने को कहा है।

​सियासी बवाल: विपक्ष ने सरकार और प्रशासन को घेरा

​हादसे के बाद बिहार की राजनीति भी गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके। तेजस्वी ने कहा कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन की विफलता के कारण ही निर्दोष श्रद्धालुओं की जान गई है।

​वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा-जदयू की सरकार में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए एक भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि भगदड़ के बाद भी समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंची, जिससे कई घायलों की स्थिति बिगड़ गई। सदाकत आश्रम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी।

​बिहार में आस्था के केंद्रों पर हादसों का पुराना इतिहास

​मघड़ा की यह घटना बिहार के धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा की पोल खोलने वाली कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसी कई त्रासदियां हुई हैं:

  • अगस्त 2024: जहानाबाद के सिद्धेश्वरनाथ मंदिर में भगदड़, 8 मौतें।
  • नवंबर 2023: छपरा के मस्तीचक में महायज्ञ के दौरान भगदड़, 2 मौतें।
  • अक्टूबर 2023: गोपालगंज के पूजा पंडाल में भगदड़, 3 मौतें।
  • वर्ष 1992: अरेराज के सोमेश्वर नाथ मंदिर में भगदड़, आधा दर्जन मौतें।

​बार-बार होते ये हादसे बताते हैं कि प्रशासनिक तंत्र ने पिछले अनुभवों से कोई सबक नहीं लिया है। जब तक वीवीआईपी सुरक्षा और आम नागरिक की सुरक्षा के बीच का यह असंतुलन खत्म नहीं होगा, तब तक आस्था के ये दरबार ऐसे ही मातम के केंद्र बनते रहेंगे।

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