मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब पाकिस्तान के अंदर भी दिखाई देने लगा है। हाल ही में पाकिस्तान में शिया और सुन्नी समुदायों के बीच तनाव बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। इस विवाद की वजह पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर का एक बयान बताया जा रहा है, जिस पर शिया धर्मगुरुओं ने कड़ी नाराजगी जताई है।
रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में हुई एक बैठक में पाकिस्तान के 12 से अधिक शिया धर्मगुरुओं ने आर्मी चीफ से मुलाकात की। इस बैठक में ईरान से जुड़े हालात और क्षेत्रीय तनाव पर चर्चा हुई। आरोप है कि इस दौरान आर्मी चीफ ने शिया समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ सख्त और अपमानजनक लहजे में बात की।
पाकिस्तानी शिया धर्मगुरु अल्लामा आगा शिफा नजफी ने इस्लामाबाद में दावा किया कि बैठक के दौरान आसिम मुनीर ने कहा कि अगर शिया समुदाय को ईरान से इतना लगाव है, तो वे वहां जाकर बस सकते हैं। इस बयान के बाद समुदाय में असंतोष बढ़ गया है।
नजफी के मुताबिक, आर्मी चीफ ने अली खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान और गिलगिट-बाल्टिस्तान में हुए प्रदर्शनों पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने खासतौर पर सेना की इमारतों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं को अस्वीकार्य बताया।
शिया धर्मगुरु ने यह भी सवाल उठाया कि जिन लोगों ने पहले पाकिस्तानी सैनिकों पर हमले किए, उनके खिलाफ ऐसी सख्त भाषा का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया, जबकि अब शिया समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।
इसके अलावा, नजफी ने यह भी दावा किया कि आर्मी चीफ ने बैठक में कहा कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता है। ऐसे में यदि ईरान सऊदी अरब पर हमला जारी रखता है, तो पाकिस्तान को सऊदी की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जबकि क्षेत्रीय हालात पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं।


