मिडिल ईस्ट तनाव से भारत की LPG सप्लाई पर असर, लेकिन पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सामान्य

मिडिल ईस्ट तनाव से भारत की LPG सप्लाई पर असर, लेकिन पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सामान्य

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर दबाव बढ़ गया है। इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से भारत में एलपीजी की सप्लाई चेन पर असर पड़ रहा है।

भारत अपनी जरूरत का आधे से ज्यादा एलपीजी खाड़ी देशों—सऊदी अरब, कतर और यूएई—से आयात करता है। भारत आने वाले एलपीजी शिपमेंट का लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। यही वजह है कि जब भी इस मार्ग में तनाव या रुकावट आती है, तो सबसे पहले इसका असर घरेलू गैस सप्लाई पर दिखाई देने लगता है।

पेट्रोल और डीजल की सप्लाई क्यों सामान्य?

एलपीजी की सप्लाई प्रभावित होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता फिलहाल सामान्य बनी हुई है। इसका मुख्य कारण भारत की कच्चे तेल की सोर्सिंग का कई देशों में फैला होना है। भारत अब 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है और हाल के वर्षों में रूस भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार, भारत का लगभग 70 प्रतिशत कच्चा तेल ऐसे समुद्री मार्गों से आता है जो होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर नहीं हैं। इसके अलावा भारत की रिफाइनरी क्षमता भी जरूरत से ज्यादा है, जिससे संकट के समय पेट्रोल और डीजल की सप्लाई बनाए रखना आसान हो जाता है।

एलपीजी संकट की असली वजह

भारत के पास कच्चे तेल को सुरक्षित रखने के लिए भूमिगत रणनीतिक भंडार मौजूद हैं। विशाखापत्तनम और मंगलुरु जैसे शहरों में बने इन विशाल भंडारों में कई हफ्तों का तेल स्टॉक रखा जा सकता है, जिससे पेट्रोल और डीजल की कमी तुरंत महसूस नहीं होती।

इसके विपरीत एलपीजी के मामले में भारत की स्टोरेज क्षमता काफी सीमित है। देश में गैस भंडारण की क्षमता दो दिन की खपत से भी कम बताई जाती है। ऐसे में सप्लाई में थोड़ी सी देरी होते ही गैस की किल्लत शुरू हो सकती है। भारत का गैस वितरण सिस्टम लगातार सप्लाई पर आधारित है, न कि लंबे समय तक बड़े स्टॉक को जमा करने पर।

उज्ज्वला योजना के बाद बढ़ी मांग

पिछले एक दशक में भारत में एलपीजी कनेक्शनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना लागू होने के बाद देश में गैस कनेक्शन करीब 14 करोड़ से बढ़कर 33 करोड़ से अधिक हो गए हैं। अब करोड़ों परिवार खाना पकाने के लिए पूरी तरह एलपीजी पर निर्भर हो गए हैं और लकड़ी या कोयले का इस्तेमाल काफी कम हो गया है।

मांग बढ़ने के कारण सरकार फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रही है। कई जगहों पर कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई सीमित की जा रही है। इसके साथ ही अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका जैसे वैकल्पिक देशों से एलपीजी आयात बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, ताकि घरेलू रसोई तक गैस की सप्लाई सुचारु बनी रहे।

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