मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब एशियाई देशों में भी दिखने लगा है। भारत में जहां एलपीजी संकट को लेकर चर्चा तेज है, वहीं पाकिस्तान में हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं। ईंधन संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सरकारी खर्च कम करने के लिए बड़ा फैसला लिया है।
शनिवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री ने सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों और स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों के वेतन में 5 से 30 प्रतिशत तक कटौती को मंजूरी दे दी। यह फैसला बढ़ती ईंधन कीमतों और उनके आर्थिक प्रभावों की समीक्षा के बाद लिया गया।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, बैठक में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सरकारी खर्च कम करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। बयान में कहा गया कि जैसे सरकारी कर्मचारियों के खर्चों में कटौती की जा रही है, उसी तरह सरकारी संरक्षण वाली कंपनियों और स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों के वेतन में भी 5 से 30 प्रतिशत तक कटौती लागू की जाएगी।
जनकल्याण में इस्तेमाल होगी बचत
सरकार के मुताबिक वेतन कटौती से होने वाली बचत का उपयोग जनकल्याण योजनाओं के लिए किया जाएगा। गौरतलब है कि हाल ही में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में प्रति लीटर करीब 55 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सरकारी वाहनों के ईंधन आवंटन में 50 प्रतिशत कटौती की जाएगी और इसकी निगरानी थर्ड-पार्टी ऑडिट के जरिए की जाएगी। इसके अलावा अगले दो महीनों में लगभग 60 प्रतिशत सरकारी वाहन सड़कों से हटाए जाएंगे।
विदेश यात्राओं और नई खरीद पर रोक
सरकार ने खर्च घटाने के लिए कई अन्य कदम भी उठाए हैं। सरकारी निगमों और संस्थाओं के बोर्ड प्रतिनिधियों को अब भागीदारी शुल्क नहीं मिलेगा और इसे बचत में शामिल किया जाएगा। नई सरकारी गाड़ियों की खरीद और अन्य बड़े सरकारी खरीदारी पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
इसके साथ ही कैबिनेट सदस्यों, मंत्रियों, सलाहकारों और विशेष सहायकों के अगले दो महीनों के वेतन को भी जनकल्याण के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी अधिकारियों, मंत्रियों, राज्यमंत्रियों और विशेष सहायकों की विदेश यात्राओं पर पहले से लगा पूर्ण प्रतिबंध जारी रहेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का पाकिस्तान पर सीधा असर पड़ रहा है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों के तेल पर निर्भर है।


