मेघ मल्हार उत्सव 2025 : कथक, राजस्थानी और बिहार की लोकधुनों ने बांधा समां

पटना, 30 अगस्त 2025।कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार और भारतीय नृत्य कला मंदिर के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को प्रेमचंद रंगशाला में ‘मेघ मल्हार उत्सव 2025’ का भव्य आयोजन किया गया।

दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक श्रीमती रूबी, भारतीय नृत्य कला मंदिर की प्रशासी पदाधिकारी सुश्री कहकशां, प्रेमचंद रंगशाला की सह-सचिव सुश्री कृति आलोक और विभाग के संयुक्त सचिव श्री महमूद आलम ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। “तमसो मां ज्योतिर्गमय” के उदघोष ने पूरे सभागार को दिव्यता और आध्यात्मिकता के आलोक से भर दिया।

कथक प्रस्तुति ने किया मंत्रमुग्ध

उत्सव की शुरुआत कटिहार के युवा कथक नर्तक राहुल रजक की प्रस्तुति से हुई। उन्होंने पद्म विभूषण पंडित बिरजू महाराज की आवाज में गाए गए मधुराष्टकं पर भावपूर्ण नृत्य कर भगवान कृष्ण की मधुरता का अद्भुत चित्रण किया।
इसके बाद उन्होंने “घनघोर बादल” और कजरी पर अनूठा कथक प्रयोग प्रस्तुत कर वर्षा ऋतु के भाव—बादलों की गड़गड़ाहट, बिजली की चमक और बूंदों की टपकन—का सजीव अनुभव कराया।

राजस्थानी लोकधुनों पर झूमे दर्शक

उत्सव के अगले चरण में राजस्थान के प्रसिद्ध गायक अली खां और उनके दल ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। “पधारो मारे देश” जैसे पारंपरिक स्वागत गीत ने बिहार की मेहमाननवाजी को और गरिमा दी।
दल ने निबुड़ा और दमादम मस्त कलंदर जैसे गीतों के साथ पारंपरिक राजस्थानी लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जिससे पूरा सभागार तालियों और झूमते कदमों से गूंज उठा।

बिहार की लोक संस्कृति की सुगंध

कार्यक्रम के अंतिम चरण में पूर्णिया की चांदनी शुक्ला और उनकी टीम ने बिहार की सांस्कृतिक रंगत को मंच पर सजाया। उन्होंने विद्यापति रचित गीत से शुरुआत की और इसके बाद भोजपुरी व मैथिली लोकगीतों की श्रंखला प्रस्तुत कर बिहार की माटी की सुगंध पूरे मंच पर फैला दी।
अंत में, भारतीय नृत्य कला मंदिर के कलाकारों ने हरिहर और श्रीहरि के यशगान पर नृत्य कर कार्यक्रम का भक्तिमय समापन किया।


 

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