समाचार के मुख्य बिंदु: सिल्क सिटी की सूरत बदलने की बड़ी तैयारी
- बड़ी बैठक: स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सभागार में नगर आयुक्त, महापौर और सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों के बीच उच्च स्तरीय मंथन संपन्न।
- क्लस्टर विभाजन: बेहतर प्रबंधन के लिए पूरे नगर निगम क्षेत्र को दो हिस्सों (वार्ड 1-26 और वार्ड 27-51) में बांटा गया; दो अलग-अलग एजेंसियां संभाल सकती हैं कमान।
- 24/7 सफाई का लक्ष्य: रविवार सहित अब तीन पालियों (Three Shifts) में होगी सफाई; रात में भी सड़कों से कूड़ा हटाने की योजना।
- नालों पर विशेष नजर: जलजमाव की समस्या से निपटने के लिए 5-5 श्रमिकों की विशेष ‘नाला उड़ाही टोली’ का होगा गठन।
- कमर्शियल कचरा प्रबंधन: शहर के सभी छोटे-बड़े दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से 100% कूड़ा उठाना अब एजेंसी की अनिवार्य जिम्मेदारी।
- VOB इनसाइट: क्लस्टर सिस्टम लागू होने से एजेंसियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और नगर निगम के लिए काम की जवाबदेही तय करना आसान होगा।
भागलपुर | 25 मार्च, 2026
भागलपुर नगर निगम ने शहरवासियों को गंदगी और जलजमाव की पुरानी समस्याओं से स्थायी निजात दिलाने के लिए ‘मिशन क्लीन सिटी’ का बिगुल फूंक दिया है। बुधवार को स्मार्ट सिटी प्रा. लि. के सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में नई सफाई एजेंसी के चयन और कार्यप्रणाली को लेकर क्रांतिकारी निर्णय लिए गए। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, नगर आयुक्त और महापौर की मौजूदगी में तैयार किए गए नए निविदा दस्तावेज (RFP) में इस बार तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि सिल्क सिटी को स्वच्छता के राष्ट्रीय मानकों पर खड़ा किया जा सके।
क्लस्टर सिस्टम और तीन शिफ्टों का ‘मास्टर स्ट्रोक’
बैठक में यह महसूस किया गया कि एक ही एजेंसी के पास पूरे शहर का जिम्मा होने से मॉनिटरिंग में कठिनाई आती है। इसे देखते हुए शहर को दो मुख्य क्लस्टरों में विभाजित करने का निर्णय लिया गया है। प्रथम क्लस्टर में वार्ड संख्या 1 से 26 तक के क्षेत्र शामिल होंगे, जबकि द्वितीय क्लस्टर में वार्ड संख्या 27 से 51 तक की जिम्मेदारी होगी।
सबसे बड़ा बदलाव सफाई के समय को लेकर किया गया है। अब भागलपुर में सफाई कार्य केवल सुबह तक सीमित नहीं रहेगा। शहर की सड़कों को निरंतर स्वच्छ रखने के लिए रविवार सहित सभी सात दिन तीन शिफ्टों में काम सुनिश्चित किया जाएगा। इससे मुख्य बाजारों और व्यस्त इलाकों में कूड़ा जमा होने की समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी।
सफाई व्यवस्था के नए मानक और प्रमुख निर्णय (विस्तृत जानकारी)
नगर निगम द्वारा तय किए गए नए मापदंडों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
1. वार्डों का वैज्ञानिक विभाजन:
नगर निगम क्षेत्र को भौगोलिक सुगमता के आधार पर दो भागों में बांटा गया है। इससे प्रशासनिक अधिकारियों को एजेंसियों के प्रदर्शन की तुलना करने और कमजोर क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने में आसानी होगी।
2. नाला उड़ाही के लिए समर्पित टीमें:
शहर में जलजमाव एक बड़ी समस्या है। इसके समाधान के लिए अब सामान्य सफाई कर्मियों के अलावा 5-5 कुशल श्रमिकों की विशेष टोलियां बनाई जाएंगी। इन टोलियों का एकमात्र कार्य नालों की निरंतर उड़ाही और सफाई सुनिश्चित करना होगा, ताकि मानसून के दौरान सड़कों पर पानी न लगे।
3. शत-प्रतिशत कूड़ा संग्रहण:
सफाई एजेंसी के लिए अब यह अनिवार्य होगा कि वह शहर के हर एक छोटे-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान से संपर्क करे और वहां से कूड़ा संग्रहण सुनिश्चित करे। इससे सड़कों के किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर डस्टबिन के बाहर गिरने वाले कचरे पर रोक लगेगी।
4. जवाबदेही और निगरानी:
माननीया महापौर ने स्पष्ट किया है कि निविदा प्रक्रिया में उन एजेंसियों को प्राथमिकता दी जाएगी जो आधुनिक मशीनों और पर्याप्त मैनपावर के साथ काम करने में सक्षम होंगी। काम की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए तकनीक का भी सहारा लिया जाएगा।
महापौर का विजन: “कूड़ा मुक्त और जलजमाव मुक्त भागलपुर”
बैठक के दौरान माननीया महापौर ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति जताते हुए कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य भागलपुर को एक स्वच्छ और सुंदर शहर के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने जोर दिया कि क्लस्टर सिस्टम से वार्ड पार्षदों को भी अपने क्षेत्र में एजेंसी पर दबाव बनाने और बेहतर काम कराने में सहूलियत होगी। तीन पालियों में सफाई से शहर की रात की सुंदरता और सुबह की स्वच्छता दोनों में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।
VOB का नजरिया: क्या धरातल पर उतरेगी यह योजना?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि नगर निगम का यह कदम कागजों पर बहुत प्रभावशाली है, लेकिन इसकी सफलता ‘कड़े पर्यवेक्षण’ (Supervision) पर निर्भर करेगी।
- मॉनिटरिंग की चुनौती: तीन शिफ्टों में काम होने पर रात की पाली में सुपरवाइजरों की उपस्थिति और काम की गुणवत्ता की जांच करना नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती होगी।
- जनता की भागीदारी: केवल एजेंसी बदलने से शहर साफ नहीं होगा; नागरिकों को भी ‘सोर्स सेग्रिगेशन’ (गीला और सूखा कचरा अलग करना) और निर्धारित समय पर कचरा देने की आदत डालनी होगी।
- एजेंसी का चयन: निविदा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए ताकि केवल सक्षम और अनुभवी एजेंसियां ही भागलपुर की कमान संभालें।
सुशासन और स्वच्छता की ओर बढ़ता भागलपुर
नगर आयुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया है कि बैठक में आए सभी तकनीकी सुझावों को निविदा दस्तावेज (RFP) में तुरंत शामिल किया जाए। उम्मीद है कि नई एजेंसी के कार्यभार संभालने के बाद भागलपुर की सफाई व्यवस्था में एक बड़ा गुणात्मक बदलाव आएगा। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया और आपके वार्ड में सफाई की जमीनी हकीकत पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।


