विक्रमशिला सेतु पर शुरू होगा 100 करोड़ का मेगा पुनर्निर्माण! दिल्ली से पहुंची एक्सपर्ट टीम, 30 नवंबर तक बहाल होगा आवागमन

भागलपुर: बिहार की लाइफलाइन माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्सों के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया अब तेज हो गई है। पुल के ध्वस्त और कमजोर हिस्सों का तकनीकी आकलन करने के लिए दिल्ली से विशेषज्ञों की टीम भागलपुर पहुंची और सेतु का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद पुनर्निर्माण कार्य को अंतिम रूप देने की कवायद शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, निर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एसपी सिंगला की आठ सदस्यीय तकनीकी टीम ने पुल के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया। टीम ने यह मूल्यांकन किया कि किन हिस्सों को पूरी तरह हटाना होगा और नए निर्माण में किस तकनीक का उपयोग किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा मानकों, डिजाइन और निर्माण मॉडल पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

तकनीकी विशेषज्ञों और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि क्षतिग्रस्त हिस्सों का पुनर्निर्माण आधुनिक कम्पोजिट स्टील बीम और कंक्रीट डेक तकनीक से किया जाएगा। यह तकनीक पुल की मजबूती और दीर्घकालिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर चुनी गई है।

इधर, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने विक्रमशिला सेतु के पुनर्निर्माण के लिए करीब 100 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर संबंधित विभाग को भेज दी है। मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी खगड़िया पुल निर्माण प्रमंडल करेगा।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि ध्वस्त हिस्से के अलावा तीन अन्य स्थानों पर भी संरचनात्मक कमजोरी पाई गई है। इन हिस्सों को भी हटाकर नए सिरे से निर्माण किया जाएगा। फिलहाल यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए चार स्थानों पर बेली ब्रिज स्थापित किए गए हैं।

पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र ने बताया कि पिलर संख्या 132 और 133 के बीच लगभग 35 मीटर लंबा स्लैब टूटकर गंगा नदी में गिर गया था। इसके बाद विस्तृत तकनीकी जांच कराई गई, जिसमें अन्य कमजोर हिस्सों की भी पहचान हुई।

मंत्री ने बताया कि गंगा नदी के जलीय जीवों और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्षतिग्रस्त स्लैब को नियंत्रित तरीके से काटकर बाहर निकाला जाएगा। पुनर्निर्माण के दौरान आधुनिक हैगिंग सेंट्रिंग स्ट्रक्चर तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और मजबूती सुनिश्चित हो सके।

सरकार ने लक्ष्य तय किया है कि आगामी 30 नवंबर तक विक्रमशिला सेतु पर सामान्य आवागमन बहाल कर दिया जाए। अधिकारियों का मानना है कि समय पर स्वीकृति मिलने पर यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

वहीं, समानांतर बन रहे नए पुल का निर्माण कर रही एजेंसी एसपी सिंगला के प्रोजेक्ट डायरेक्टर जी.के. राय ने बताया कि पिछले 20 दिनों से पुल की लगातार तकनीकी जांच की जा रही है। अल्ट्रासोनिक टेस्ट, रिबाउंड हैमर टेस्ट, क्रैक मैपिंग और स्टील संरचना की मोटाई मापने जैसी आधुनिक तकनीकों से पुल की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की दुर्घटना की संभावना को समाप्त किया जा सके।

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