भागलपुर | 23 फरवरी, 2026: भागलपुर का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल, मायागंज (JLNMCH), इन दिनों खुद प्रशासनिक बदहाली का शिकार नजर आ रहा है। अस्पताल के मेडिसिन विभाग और इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड में आने वाले मरीजों को बुनियादी जांच सुविधाओं के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। स्थिति यह है कि गंभीर हालत में पहुँचे मरीजों को भी ईसीजी और खून जांच के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
क्यों ठप हुईं सुविधाएं?
अस्पताल में इस संकट की मुख्य वजह हाल ही में की गई ‘मानव बल’ (Staff) की कटौती है। अस्पताल प्रबंधन ने पुराने कर्मचारियों को हटा तो दिया, लेकिन उनके स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था करना भूल गया।
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प्रभावित क्षेत्र |
मुख्य समस्या |
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इमरजेंसी वार्ड |
ईसीजी (ECG) मशीन चलाने वाले तकनीशियनों की कमी। |
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मेडिसिन विभाग |
खून के नमूने (Blood Samples) लेने और रिपोर्ट तैयार करने वाले स्टाफ का अभाव। |
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आम जनता |
जांच के लिए निजी सेंटरों पर जाने को मजबूर, आर्थिक बोझ बढ़ा। |
विभागाध्यक्ष ने खोला मोर्चा: शीर्ष अधिकारियों को भेजी रिपोर्ट
मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजकमल चौधरी ने इस अव्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बिना कर्मचारियों के विभाग चलाना अब मुमकिन नहीं रह गया है।
इन्हें भेजी गई लिखित शिकायत:
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- अस्पताल अधीक्षक: स्थानीय स्तर पर त्वरित समाधान के लिए।
- स्वास्थ्य सचिव, बिहार: राज्य स्तर पर हस्तक्षेप की मांग।
- कमिश्नर अवनीश कुमार सिंह: भागलपुर प्रमंडल के आला अधिकारी को मामले की गंभीरता से अवगत कराया गया।
“हटाए गए मानव बल के बदले कोई वैकल्पिक कर्मचारी नहीं दिया गया है। इस कमी के कारण उत्पन्न हुई अव्यवस्था की जानकारी हमने लिखित रूप में कमिश्नर और स्वास्थ्य सचिव को दे दी है।” — डॉ. राजकमल चौधरी, अध्यक्ष (मेडिसिन विभाग)
मरीजों की जान पर बन आई
अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों का कहना है कि डॉक्टर दवाएं तो लिख देते हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट समय पर न मिलने के कारण सही इलाज शुरू होने में देरी हो रही है। खासकर हृदय रोग और इमरजेंसी के मरीजों के लिए यह ‘सिस्टम की लापरवाही’ जानलेवा साबित हो सकती है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


