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भस्मकूट पर्वत पर गिरा था माता सती का वक्ष स्थल, पढ़ें कालिका पुराण की मान्यता

ByShailesh Kumar

Oct 14, 2021

गया शहर के भस्मकूट पर्वत पर मां का स्तन गिरा था, इसीलिए इस शक्तिपीठ को पालनपीठ भी कहते हैं। जिसे पालनहार के रूप में भी जाना जाता है। यहां आने वाले भक्त श्रद्धा और आस्था के साथ मां की पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने पर भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती हैं। यही वजह है कि यह देश के सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर का उल्लेख पद्म पुराण, वायु पुराण, अग्नि पुराण और अन्य लेखों में मिलता है। तांत्रिक कार्यों में भी इस मंदिर को देश भर में प्रमुखता दी जाती है।

कालिका पुराण के अनुसार, गया में सती का स्तन मंडल भस्मकूट पर्वत के ऊपर गिरकर दो पत्थर बन गए थे। इसी प्रस्तरमयी स्तन मंडल में मां नित्य निवास करती हैं जो मनुष्य शिला का स्पर्श करते हैं, वे अमरत्व को प्राप्त कर ब्रह्मलोक में जाते हैं।

मंगलागौरी आने वाले भक्त मानते हैं कि यहां पूजा करने वाले किसी भी भक्त को मां मंगला खाली हाथ नहीं भेजतीं। वैसे तो पूरे साल इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान पूरे नौ दिन मंदिर की छटा देखते बनती है। मंदिर के गर्भगृह में ऐसे तो काफी अंधेरा रहता है, लेकिन यहां वषोर्ं से एक दीप प्रज्वलित हो रहा है जिसके बारे में मान्यता है कि कभी नहीं बुझता।