
अररिया/जोगबनी। बिहार के सीमावर्ती जिले अररिया में पुलिस महकमे के भीतर चल रही ‘काली भेड़ों’ की पहचान और उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई ने पूरे प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए कर्तव्यहीनता, अनैतिक कार्यों में संलिप्तता और अपराधियों के साथ ‘गठजोड़’ के गंभीर आरोपों में चार पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। 4 अप्रैल 2026 की यह कार्रवाई केवल निलंबन नहीं है, बल्कि उन पुलिस अधिकारियों के लिए एक खुली चेतावनी है जो वर्दी की आड़ में कानून की धज्जियां उड़ाने का काम कर रहे थे। इस कार्रवाई की सबसे बड़ी मार भारत-नेपाल सीमा पर स्थित संवेदनशील जोगबनी थाना पर पड़ी है, जहाँ थानेदार और अपर थानेदार दोनों को एक साथ ‘लाइन हाजिर’ कर जेल की राह दिखाई गई है।
जोगबनी का ‘नशा सिंडिकेट’ और खाकी का दाग
अररिया जिले का जोगबनी क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा होने के कारण मादक पदार्थों की तस्करी के लिए हमेशा से संवेदनशील रहा है। पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार को गुप्त सूचना मिल रही थी कि जोगबनी थाने के मुख्य अधिकारियों का तस्करों के साथ गहरा याराना है। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जोगबनी थानाध्यक्ष राजीव कुमार आजाद और अपर थानाध्यक्ष गोरख कुमार न केवल तस्करों की गतिविधियों से वाकिफ थे, बल्कि उन्हें पुलिसिया दबिश से बचाने और तस्करी के रास्तों को सुरक्षित बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
मादक पदार्थों के सौदागरों के साथ पुलिस का यह ‘नापाक गठजोड़’ सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ था। एसपी ने इस मामले में तकनीकी साक्ष्यों और खुफिया रिपोर्टों का मिलान किया, जिसमें पाया गया कि दोनों अधिकारी तस्करों के साथ निरंतर संपर्क में थे और उनके ‘सिंडिकेट’ का हिस्सा बन चुके थे। वर्दी की गरिमा को ताक पर रखकर ‘काली कमाई’ के इस खेल ने जोगबनी पुलिस की छवि को पूरी तरह धूमिल कर दिया था, जिसके बाद जितेंद्र कुमार ने बिना किसी देरी के दोनों को निलंबित करने का आदेश जारी किया।
फारबिसगंज: जब न्याय की कुर्सी ‘पक्षपात’ की भेंट चढ़ी
कार्रवाई की दूसरी गाज फारबिसगंज के थानाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह पर गिरी है। फारबिसगंज जैसा महत्वपूर्ण और व्यापारिक केंद्र होने के कारण यहाँ पुलिस की निष्पक्षता बहुत मायने रखती है। राघवेंद्र सिंह पर आरोप है कि उन्होंने एक संवेदनशील मुकदमे में अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी को भूलकर ‘विपक्षी’ पक्ष के साथ साठगांठ कर ली। न्याय की उम्मीद में थाने पहुँचे फरियादी की बात सुनने के बजाय, उन्होंने आरोपी पक्ष को लाभ पहुँचाने के लिए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ और जांच की दिशा मोड़ने का प्रयास किया।
पुलिस अधीक्षक के अनुसार, राघवेंद्र सिंह का यह कृत्य पेशेवर दुराचार की श्रेणी में आता है। जब कानून का रक्षक ही भक्षक बनकर किसी खास पक्ष की वकालत करने लगे, तो आम जनता का भरोसा सिस्टम से उठ जाता है। फारबिसगंज थानेदार के खिलाफ मिली शिकायतों की आंतरिक जांच में जब आरोपों की पुष्टि हुई, तो उन्हें भी निलंबित कर विभागीय जांच का सामना करने का निर्देश दिया गया है।
कुआड़ी थानेदार का ‘अनैतिक’ कांड: वायरल फोटो ने खोली पोल
निलंबन की इस फेहरिस्त में सबसे ज्यादा चर्चा कुआड़ी थानाध्यक्ष प्रेम कुमार की हो रही है। प्रेम कुमार की एक महिला के साथ ‘आपत्तिजनक’ स्थिति में तस्वीरें सोशल मीडिया और स्थानीय हलकों में वायरल हो गई थीं। एक पुलिस अधिकारी से समाज में उच्च नैतिक मानकों की अपेक्षा की जाती है, लेकिन प्रेम कुमार की इन तस्वीरों ने खाकी को सरेआम शर्मसार कर दिया।
अररिया एसपी जितेंद्र कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया कि पुलिस बल में अनुशासनहीनता और अनैतिक आचरण के लिए कोई स्थान नहीं है। प्रेम कुमार का यह कृत्य न केवल उनके पद की गरिमा के खिलाफ था, बल्कि इससे पुलिस की सामाजिक प्रतिष्ठा को भी भारी ठेस पहुँची है। तस्वीर के सामने आने और उसकी प्रारंभिक सत्यता की जांच के बाद उन्हें तुरंत पदमुक्त कर निलंबित कर दिया गया है।
पुलिस अधीक्षक का कड़ा रुख: ‘काम में कोताही और अपराध में साझेदारी बर्दाश्त नहीं’ (विशेष विश्लेषण)
द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, जितेंद्र कुमार की यह कार्रवाई अररिया पुलिस के भीतर एक ‘शुद्धिकरण अभियान’ की शुरुआत मानी जा रही है। पिछले कुछ समय से सीमावर्ती जिलों में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे थे।
- जीरो टॉलरेंस की नीति: एसपी ने यह संदेश दे दिया है कि वे केवल छोटे कर्मचारियों पर नहीं, बल्कि सीधे स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) स्तर के अधिकारियों पर भी कार्रवाई करने से नहीं हिचकिचाएंगे।
- सीमावर्ती क्षेत्रों में नकेल: जोगबनी में हुई कार्रवाई का सीधा असर नेपाल सीमा पर होने वाली तस्करी पर पड़ेगा। जब रक्षक ही मुस्तैद होंगे, तभी तस्करी रुकेगी।
- नैतिकता और अनुशासन: कुआड़ी के मामले में हुई कार्रवाई यह बताती है कि पुलिसकर्मियों के व्यक्तिगत आचरण पर भी प्रशासन की पैनी नजर है।
भ्रष्टाचार और गठजोड़ के बीच पिसती जनता
अररिया के इन चार अधिकारियों का निलंबन यह भी उजागर करता है कि स्थानीय स्तर पर पुलिस और अपराधियों के बीच की लकीर कितनी धुंधली हो गई थी। जनता अक्सर शिकायत करती है कि थाने में सुनवाई नहीं होती या पैसे वालों का बोलबाला रहता है। फारबिसगंज और जोगबनी की घटनाएं इन शिकायतों पर मुहर लगाती हैं। राघवेंद्र सिंह जैसे अधिकारी जब एक पक्षीय होकर काम करते हैं, तो निर्दोष व्यक्ति व्यवस्था से लड़ने की हिम्मत हार जाता है।
वहीं, राजीव कुमार आजाद और गोरख कुमार जैसे अधिकारियों ने ‘सुरक्षा’ को ही ‘सौदा’ बना लिया था। सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रग्स की बढ़ती समस्या के पीछे अक्सर ऐसे ही ‘भीतरघाती’ अधिकारियों का हाथ होता है। जितेंद्र कुमार की यह सर्जिकल स्ट्राइक उन तमाम थानेदारों के लिए एक सबक है जो समझते हैं कि वे अपने इलाके के ‘बेताज बादशाह’ हैं।
क्या केवल निलंबन काफी है?
निश्चित रूप से, एसपी जितेंद्र कुमार की यह त्वरित कार्रवाई प्रशंसनीय है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल निलंबन से व्यवस्था सुधर जाएगी? अक्सर देखा जाता है कि कुछ समय बाद ऐसे अधिकारी विभागीय पैरवी के जरिए वापस बहाल हो जाते हैं और फिर से उन्हीं मलाईदार पदों पर बैठ जाते हैं।
- कठोर दंड की जरूरत: भ्रष्टाचार और तस्करी में संलिप्त अधिकारियों पर केवल निलंबन नहीं, बल्कि सेवा समाप्ति और आपराधिक मुकदमा चलना चाहिए।
- निगरानी तंत्र: क्या जिला स्तर पर कोई ऐसा तंत्र है जो समय-समय पर थानेदारों की संपत्तियों और उनके संपर्कों की जांच करे?
- मनोवैज्ञानिक परीक्षण: अनैतिक कृत्यों में शामिल होने वाले अधिकारियों के लिए नियमित ट्रेनिंग और एथिक्स (नैतिकता) की कक्षाएं अनिवार्य होनी चाहिए।
समाधान की दिशा में एक साहसिक पहल
अररिया एसपी द्वारा चार अधिकारियों को एक साथ निलंबित करना यह साबित करता है कि बिहार पुलिस में अब जवाबदेही तय की जा रही है। 4 अप्रैल की यह घटना उन पुलिसकर्मियों के लिए एक आइना है जो अपनी वर्दी का उपयोग निजी लाभ के लिए करते हैं। जोगबनी, फारबिसगंज और कुआड़ी के इन मामलों ने यह साफ कर दिया है कि अपराधी चाहे वर्दी के बाहर हो या वर्दी के भीतर, कानून की नजर से वह बच नहीं सकता।
द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस साहसिक कदम का स्वागत करती है। हम उम्मीद करते हैं कि अररिया की जनता को अब उन नए अधिकारियों के नेतृत्व में निष्पक्ष न्याय मिलेगा जो इन रिक्त पदों को संभालेंगे। फिलहाल, जिले के अन्य थानों में तैनात अधिकारी और कर्मी इस कार्रवाई के बाद ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में हैं और अपनी फाइलों को दुरुस्त करने में जुटे हैं। जितेंद्र कुमार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ‘सुशासन’ केवल कागजों पर नहीं, बल्कि थानों की कार्यशैली में भी दिखना चाहिए।


