नई दिल्ली।आज महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि है। देश उन्हें शहीद दिवस के रूप में याद कर रहा है। 30 जनवरी 1948 की शाम नई दिल्ली के बिड़ला हाउस (अब गांधी स्मृति) में नाथूराम विनायक गोडसे ने उन्हें तीन गोलियां मारी थीं। गांधीजी के अंतिम शब्द थे— “हे राम।”
अक्सर यह कहा जाता है कि गांधीजी की हत्या भारत-पाक विभाजन के कारण हुई, लेकिन ऐतिहासिक तथ्य बताते हैं कि उनकी हत्या की साजिश विभाजन से वर्षों पहले ही रची जा चुकी थी। गांधी पर कम से कम पांच बार जानलेवा हमले किए गए थे, जिनमें से चार प्रयास उस समय हुए जब देश के विभाजन की कोई संभावना भी नहीं थी।
हत्या के बाद देवदास गांधी से मिली थी गोडसे की मुलाकात
नाथूराम गोडसे और उनके भाई गोपाल गोडसे ने मिलकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया। गोपाल गोडसे ने अपनी पुस्तक ‘गांधी वध क्यों?’ में लिखा है कि हत्या के बाद जब गांधीजी के बेटे देवदास गांधी संसद मार्ग थाने पहुंचे तो वहां उनकी मुलाकात नाथूराम से हुई।
नाथूराम ने देवदास से कहा—
“मैंने यह किसी व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं किया। यह एक राजनीतिक फैसला था।”
उसने दावा किया कि गांधी की नीतियां मुस्लिमों के पक्ष में थीं और भारत के विभाजन के लिए वही जिम्मेदार हैं।
‘अखंड भारत’ की शर्त पर अस्थियां बहाने की वसीयत
नाथूराम गोडसे ने अपनी वसीयत में लिखा था कि जब तक अखंड भारत का सपना पूरा नहीं होता, तब तक उसकी अस्थियां संरक्षित रखी जाएं। उसने यह भी लिखा कि सपना पूरा होने पर उसकी अस्थियां सिंधु नदी में विसर्जित की जाएं।
इतिहासकारों की राय
राजनीतिक इतिहासकार शम्सुल इस्लाम के अनुसार—
“गांधी की हत्या केवल विभाजन के कारण नहीं हुई। उन्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे सामाजिक समानता, दलित उत्थान और सांप्रदायिक सद्भाव के प्रतीक थे। हिंदुत्ववादी शक्तियों को उनकी विचारधारा स्वीकार नहीं थी।”
गांधीजी पर हुए 5 जानलेवा हमले
1. पुणे (1934) – कार पर बम हमला
गांधीजी की कार पर बम फेंका गया, जो पास में गिरकर फट गया। वे बाल-बाल बच गए।
2. पंचगनी (1944) – छुरा घोंपने की साजिश
नाथूराम गोडसे 15–20 लोगों के साथ प्रार्थना सभा में पहुंचा। हमला विफल रहा।
3. सेवाग्राम (1944) – खंजर के साथ गिरफ्तार
जिन्ना से गांधी की मुलाकात से नाराज गोडसे को खंजर के साथ पकड़ा गया। गांधी ने उसे माफ कर दिया।
4. मुंबई–पुणे ट्रेन हमला (1946)
‘गांधी स्पेशल’ ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिश की गई।
5. दिल्ली (1948) – सफल हत्या
30 जनवरी 1948 को शाम 5:17 बजे बिड़ला हाउस में गांधीजी की हत्या कर दी गई।
हत्या के बाद RSS पर प्रतिबंध
गांधीजी की हत्या के बाद 4 फरवरी 1948 को तत्कालीन गृह मंत्री सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया।
सरकारी आदेश में कहा गया कि देश की एकता को खतरे में डालने वाली हिंसक शक्तियों को जड़ से समाप्त करना आवश्यक है।
‘नाथूराम RSS में था’ – गोपाल गोडसे का दावा
1994 में ‘फ्रंटलाइन’ को दिए इंटरव्यू में गोपाल गोडसे ने कहा—
“हम सभी RSS में पले-बढ़े। नाथूराम ने कोर्ट में संगठन छोड़ने की बात सिर्फ इसलिए कही थी ताकि RSS मुश्किल में न पड़े।”
गांधी आज भी ज़िंदा हैं…
उनके विचारों में, उनके संघर्ष में और उनके सत्य के रास्ते में।
शहीद दिवस पर राष्ट्र उन्हें नमन करता है।

