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विवाहिता बोली- मेरे पति मृत्युशैय्या पर हैं, मुझे उनके स्पर्म से ही बच्चा चाहिए, हाईकोर्ट ने कहा- इजाजत है

ByRajkumar Raju

Jul 21, 2021

गुजरात की एक युवती की कनाडा में अक्टूबर 2020 में शादी हुई थी। शादी के 4 महीने बाद उसे सूचना मिली कि, गुजरात में उसके ससुर को हार्ट अटैक आ गया है। इस पर वह अपने पति के साथ वडोदरा लौटी। यहां लौटने पर उसके पति को कोरोना हो गया। 10 मई से पति की हालत नाजुक हो गई। दो महिने से पति एक प्राइवेट हॉस्पिटल में वेंटिलेटर पर है। डॉक्टरों ने कहा कि, हालत बेहद गंभीर हो गई है और अब वह 48 घंटे से ज़्यादा जिंदा नहीं रहेगा। इस पर पति को खोने के डर से बिलबिलाई युवती ने गुजरात हाईकोर्ट का रूख किया।

‘मेरे पति वेंटिलेटर पर, मुझे उनसे ही बच्चा चाहिए’

हाईकोर्ट के समक्ष युवती ने गुहार लगाई कि, मुझे अपने पति का स्पर्म चाहिए, ताकि मैं उनके बच्चे को जन्म दे सकूं। मगर, मेडिकल कानून इसकी इजाजत नहीं देता। कृपया मेरी प्रार्थना सुनें। तब हाईकोर्ट ने सारी सुनवाई रोककर इस मामले को सुना। फिर 15 मिनट के अंदर फोन पर ही स्टर्लिंग हॉस्पिटल को आईवीएफ प्रोसिजर का आदेश दे दिया। इतिहास में संभवत: पहली बार ऐसा हुआ, जब हाईकोर्ट ने सारी सुनवाई रोककर एक पति के लिए बिलखती उसकी पत्नी की गुहार सुनी।

कोरोना संकट का यह अनोखा मामला गुजरात का है

युवती के मुताबिक, “डॉक्टरों ने मुझसे और मेरे सास-ससुर से कहा था कि अब तुम्हारे पति की ​तबियत में सुधार की गुंजाइश न के बराबर है। वह ज्यादा से ज्यादा 3 दिन जी पाएगा। डॉक्टरों की यह बात सुनकर मैं घबरा गई। उसके बाद मैंने कहा कि मैं अपने पति के अंश से मातृत्व सुख पाना चाहती हूं। इसलिए मुझे उनका स्पर्म ही दिलवा दो। इस पर भी डॉक्टरों ने निराश किया। डॉक्टरों ने कहा कि, यह मेडिकल लीगल केस है और ऐसे स्पर्म नहीं दिया जा सकता।” युवती ने इसी के बाद हाईकोर्ट जाने का फैसला किया। तब हाईकोर्ट ने फौरन सुनवाई करते हुए इजाजत दे दी।