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झगड़े में मामा ने किया भांजी का कत्ल, मां-बाप की सहमति से दफना दिया शव

ByShailesh Kumar

Jun 11, 2021

मध्य प्रदेश के भिंड जिले में बीते रोज भारौली के बीहड़ से निकल कर आई 10 साल की मासूम की हत्या की भनक ने आख़िरकार यथार्थ रूप ले लिया है. भारौली क्षेत्र में नाना की 13वीं में शामिल होने आई मासूम की दो मामाओं के जमीनी विवाद में गोली लगने से मौत हो गई थी, लेकिन इस वारदात को समाज के ठेकेदारों ने मिलकर दबा दिया था. लेकिन मीडिया को पता चलते ही मामले ने तूल पकड़ा और दबाव बढ़ते ही पुलिस हरकत में आई. सबूतों और जानकारी के आधार पर बीहड़ में बने एक खेत से मासूम का शव बरामद कर लिया है. कार्रवाई के दौरान डीएसपी समेत भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अमला मौक़े पर मौजूद रहा. शव मिलने के बाद अब पुलिस मामले में एफ़आईआर की कार्रवाई में जुट गई है और आरोपियों की तलाश प्रारंभ कर दी है.

दरअसल, भिंड की भारौली पुलिस ने बुधवार को सीताराम का पुरा गांव पहुंच कर बच्ची का शव बरामद कर लिया है. बीते दिन मामाओं द्वारा भांजी की हत्या और फिर पुलिस से छिपाकर उसके शव को दफ़नाकर वारदात को दबाने का प्रयास किया गया था. लेकिन मीडिया की सक्रिय भूमिका के चलते पुलिस को मामले की जानकारी लगी और तहक़ीक़ात शुरू की गई. शुरुआती तौर पर पुलिस इस घटना के सम्बंध में जानकारी जुटाने गांव पहुंची थी, लेकिन किसी ने कोई जानकारी नहीं दी. ऐसे में इस वारदात का कोई आधार नहीं मिला.

मामला मीडिया में उछलते ही पुलिस ने अलग स्तर पर जांच शुरू की. पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी की बहन की बेटी को गोली लगी थी. ऐसे में मुरैना ज़िले में पुलिस ने बच्ची के माता पिता से सम्पर्क किया. शुरू में उन्होंने कुछ नहीं बताया, लेकिन जब पुलिस ने उन्हें समझाईश दी, तब जाकर बच्ची के पिता ने घटना के बारे में बताया कि बच्ची मां के साथ मामा के घर आई थी. यहां उनके झगड़े में चली गोली लगने से उसकी मौत हो गई थी और समाज के दबाब के चलते उन्होंने बच्चे को दफ़नाने पर सहमति दी थी. मौत के बाद उसे घर से करीब आधा किलोमीटर दूर बीहड़ों में बने एक खेत में ढाई फीट गहरी कब्र खोद कर दफ़नाया गया था. घटना की पुष्टि होने पर भारौली पुलिस बच्ची के पिता की लेकर गांव सीताराम का पुरा पहुंची. जहां पिता द्वारा बताए गए स्थान को चिन्हित कर खुदाई कराई गई, जिसमें बच्ची का शव मिला जो बुरी तरह से सड़ चुका था.

यह है पूरा मामला

भिंड जिले के भरौली थाना क्षेत्र में सीताराम के पुरा गांव में बीती 7 मई को रामलखन कुशवाह की मौत हो गई थी. जिनकी तेरहवीं 20 मई को थी. अपने पिता की तेरहवीं में शामिल होने के लिए मुरैना जिले के डिरोली गांव से अट्टो देवी अपनी नाबालिग बेटी के साथ आई हुई थी. तेरवीं के अगले दिन 21 मई को मृतक के बेटे मोनू कुशवाह और बुद्धू सिंह कुशवाह में बंटवारे को लेकर आपसी विवाद हो गया. बात मरने मारने पर आ गई. इसी बीच मृतक रामलखन की बंदूक छोटा बेटा उठा लाया और फायर कर दिया. झगड़े में चली गोली अट्टो देवी की 11 साल की बेटी को लगी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई. मौत के बाद परिवार ने अपनी बहन अट्टो को मनाया और पुलिस में रिपोर्ट ना करते हुए बेटी को दफन कर दिया.

इस पूरी घटना के बारे में गांव को जानकारी होने के बाद भी चुप्पी साध ली गयी और मामले को दबा दिया गया. हत्या के बाद राज खुलने का डर और उपयोग हुए हथियार की बरामदगी से बचने के लिए भी आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने बंदूक पुलिस थाने फौती के तौर पर जमा करवा दी गई. 17 दिन बाद आरोपियों ने अपने घर सीताराम के पुरा में अपने समाज की पंचायत जोड़ी, जिसमें आसपास के गांव से समाज के लोगों को बुलाया गया. करीब 100 से ज़्यादा लोग इकट्ठे हुए.