विक्रमशिला एक्सप्रेस में बिछड़े बच्चे को टीटीई टीम ने सुरक्षित मिलाया, मालदा मंडल की सतर्कता और संवेदनशीलता की मिसाल

मालदा मंडल से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पूर्व रेलवे के कर्मचारियों ने एक बार फिर अपनी सतर्कता और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए एक बिछड़े बच्चे को उसके परिजनों से सुरक्षित मिलाने का सराहनीय कार्य किया है। यह घटना न केवल रेलवे कर्मचारियों की कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाती है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी उजागर करती है।

जानकारी के अनुसार, 17 अप्रैल 2026 को ट्रेन संख्या 12367 विक्रमशिला एक्सप्रेस में ड्यूटी के दौरान भागलपुर के टिकट जांच स्टाफ की नजर एक छोटे बच्चे पर पड़ी, जो कोच संख्या B5 के दरवाजे के पास अकेला खड़ा था। यह स्थिति बेहद संवेदनशील और संभावित रूप से खतरनाक थी, क्योंकि चलती ट्रेन में अकेले खड़े बच्चे के साथ किसी भी तरह की अनहोनी हो सकती थी। ऐसे में ड्यूटी पर मौजूद टीटीई टीम ने तुरंत सतर्कता दिखाते हुए बच्चे के पास पहुंचकर उससे बातचीत की।

टीम में शामिल वरिष्ठ टीटीई संजय कुमार पांडेय और टीटीआई अमित कुमार ने बच्चे से पूछताछ की, तो पता चला कि वह अपने माता-पिता से बिछड़ गया है। बच्चे ने बताया कि उसके माता-पिता पटना जंक्शन पर उतर गए थे, जबकि वह अनजाने में ट्रेन में ही रह गया। यह जानकारी मिलते ही स्थिति की गंभीरता को समझते हुए टीटीई टीम ने बिना समय गंवाए त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी।

सबसे पहले टीम ने बच्चे के परिजनों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की। आवश्यक जानकारी जुटाकर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भी सूचित किया, ताकि समन्वय के साथ आगे की कार्रवाई की जा सके। इस दौरान वाणिज्य नियंत्रण दानापुर और मालदा मंडल को भी मामले की जानकारी दी गई, जिससे सभी स्तरों पर आवश्यक सुरक्षा प्रक्रिया को सुनिश्चित किया जा सके।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बच्चे के पिता से संपर्क स्थापित होने के बाद उन्होंने पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन पर पहुंचकर बच्चे को लेने की पुष्टि की। इसके बाद रेलवे ने पूरी योजना के तहत बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उसे वहां तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था की। इस दौरान बच्चे को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा गया।

निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, बच्चे को पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन पर स्थित चाइल्ड हेल्पलाइन टीम को सौंप दिया गया, ताकि उसकी देखरेख उचित पर्यवेक्षण में की जा सके। यह कदम इसलिए उठाया गया, ताकि बच्चे की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित हो और उसे सुरक्षित वातावरण में रखा जा सके, जब तक कि उसके परिजन वहां पहुंचकर उसे अपने साथ न ले जाएं।

बाद में बच्चे के पिता ने अपने पुत्र से सुरक्षित मिलन की पुष्टि करते हुए भारतीय रेल के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यदि रेलवे कर्मचारियों ने समय पर कार्रवाई नहीं की होती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। उन्होंने टीटीई टीम की तत्परता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की सराहना करते हुए इसे एक उदाहरण बताया।

इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए मालदा मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक कार्तिक सिंह ने भी टीटीई टीम की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं यह दिखाती हैं कि रेलवे कर्मचारी न केवल अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण के साथ यात्रियों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। उन्होंने इसे रेलवे की सेवा भावना और जिम्मेदारी का प्रतीक बताया।

रेलवे प्रशासन का मानना है कि इस तरह की घटनाएं कर्मचारियों के प्रशिक्षण और उनकी सजगता का परिणाम होती हैं। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे लगातार अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षित करता है और उन्हें हर परिस्थिति में सही निर्णय लेने के लिए तैयार करता है। इस घटना में भी टीटीई टीम ने जिस तरह से सूझबूझ और तत्परता दिखाई, वह इसकी एक मिसाल है।

यह घटना समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि जिम्मेदारी और सतर्कता से किसी भी बड़ी समस्या को टाला जा सकता है। एक छोटे बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित कर उसे उसके परिवार से मिलाना न केवल एक प्रशासनिक सफलता है, बल्कि यह एक मानवीय उपलब्धि भी है, जो लंबे समय तक याद रखी जाएगी।

मालदा मंडल ने इस पूरे घटनाक्रम पर गर्व जताते हुए कहा है कि भागलपुर की टीटीई टीम ने जिस तरह से अपनी जिम्मेदारी निभाई, वह अन्य कर्मचारियों के लिए प्रेरणादायक है। उनकी इस कार्रवाई से न केवल एक बच्चे की जान सुरक्षित रही, बल्कि एक परिवार की खुशियां भी वापस लौटीं।

रेलवे जैसे विशाल नेटवर्क में जहां हर दिन लाखों यात्री सफर करते हैं, वहां इस तरह की घटनाएं यह साबित करती हैं कि सतर्कता और संवेदनशीलता के साथ काम करने पर हर चुनौती का समाधान संभव है। यह घटना भारतीय रेल की उस छवि को और मजबूत करती है, जिसमें यात्रियों की सुरक्षा और सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।

कुल मिलाकर, विक्रमशिला एक्सप्रेस में हुई यह घटना न केवल एक सकारात्मक उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाती है कि जब कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय भावना साथ मिलती है, तो परिणाम हमेशा प्रेरणादायक होता है।

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