लू से बचाव को लेकर मालदा मंडल की पहल: साहिबगंज मेडिकल यूनिट में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

मालदा/साहिबगंज। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच आम लोगों के साथ-साथ रेलवे कर्मचारियों और यात्रियों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंडल द्वारा साहिबगंज स्थित मेडिकल हेल्थ यूनिट (MHU) में हीट वेव (लू) से बचाव को लेकर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य लोगों को गर्मी से होने वाले खतरों और उनसे बचाव के उपायों के प्रति सचेत करना था।

यह कार्यक्रम मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में तथा मंडल रेलवे अस्पताल, मालदा की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुपा घोष के सहयोग से 28 अप्रैल 2026 को आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन एडीएमओ/एमएचयू साहिबगंज के डॉ. जी.पी. सिंह द्वारा किया गया, जिन्होंने बेहद सरल और प्रभावी तरीके से प्रतिभागियों को जानकारी दी।

कार्यक्रम में 15 से अधिक रेलवे कर्मचारियों और लाभार्थियों ने भाग लिया। इसमें विशेष रूप से उन लोगों को शामिल किया गया जो गर्मी के प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, जैसे बुजुर्ग, बच्चे और खुले में काम करने वाले कर्मचारी।

अपने व्याख्यान के दौरान डॉ. जी.पी. सिंह ने बताया कि हीट वेव केवल असहजता ही नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी है, जो समय पर सावधानी न बरतने पर जानलेवा साबित हो सकता है। उन्होंने हीट एग्जॉशन (Heat Exhaustion) और हीट स्ट्रोक (Heat Stroke) के बीच अंतर को समझाते हुए बताया कि इनकी पहचान समय रहते करना बेहद जरूरी है।

उन्होंने बताया कि हीट एग्जॉशन के लक्षणों में अत्यधिक पसीना आना, कमजोरी, चक्कर आना और सिरदर्द शामिल हैं, जबकि हीट स्ट्रोक एक गंभीर स्थिति होती है, जिसमें शरीर का तापमान अचानक बहुत अधिक बढ़ जाता है और व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है।

डॉ. सिंह ने प्रतिभागियों को यह भी बताया कि डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) गर्मी के दौरान सबसे बड़ी समस्या होती है। इससे बचने के लिए नियमित अंतराल पर पानी पीना, ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) का सेवन करना और नारियल पानी, नींबू पानी जैसे तरल पदार्थ लेना बेहद जरूरी है।

उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी व्यक्ति में हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत प्राथमिक उपचार देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर उसे नजदीकी अस्पताल में रेफर करना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर स्थिति को टाला जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को यह भी सलाह दी गई कि वे दोपहर के समय, खासकर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच, अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें। यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो हल्के और ढीले कपड़े पहनें, सिर को ढककर रखें और पर्याप्त मात्रा में पानी साथ रखें।

मालदा मंडल की इस पहल का उद्देश्य केवल जानकारी देना ही नहीं, बल्कि लोगों में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करना है, ताकि वे स्वयं के साथ-साथ दूसरों की भी मदद कर सकें।

रेलवे प्रशासन का मानना है कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम न केवल कर्मचारियों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि आपदा की स्थिति में बेहतर तैयारी भी सुनिश्चित करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हीट वेव की घटनाएं बढ़ रही हैं, ऐसे में इस तरह की पहलें बेहद जरूरी हो गई हैं। इससे लोगों को समय रहते सावधानी बरतने और गंभीर परिस्थितियों से बचने में मदद मिलती है।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना की और कहा कि उन्हें गर्मी से बचाव के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, जो उनके दैनिक जीवन में काफी उपयोगी साबित होंगी।

मालदा मंडल ने यह स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस तरह के स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि कर्मचारियों और यात्रियों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

अंततः, यह पहल दर्शाती है कि रेलवे केवल यात्रा सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्रियों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को भी उतनी ही प्राथमिकता देता है। भीषण गर्मी के इस दौर में इस तरह के कार्यक्रम लोगों के लिए एक जरूरी और उपयोगी पहल साबित हो रहे हैं।

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