मकर संक्रांति 2026: इस बार खिचड़ी पर्व 15 जनवरी को मनाना होगा, क्योंकि 14 जनवरी को एकादशी

मकर संक्रांति साल के पहले बड़े पर्व के रूप में मनाई जाती है। इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत मानी जाती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार उत्तरायण का आरंभ अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक और जीवन में शुभता का संकेत है।


14 जनवरी को होगा सूर्य का राशि परिवर्तन

पंचांग के अनुसार 14 जनवरी 2026 को दोपहर 3:07 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यह संक्रमण दिन को लंबा और रात को छोटा करने का कारण बनेगा। इसी दिन से उत्तरायण प्रारंभ माना जाता है, जो सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है।

विशेष बात यह है कि इस वर्ष मकर संक्रांति षटतिला एकादशी के साथ आ रही है। यह दुर्लभ संयोग करीब 23 साल बाद बन रहा है। ज्योतिषाचारियों के अनुसार इस दिन दान, स्नान और पूजा करने से विशेष फल मिलता है। इस वर्ष महापुण्यकाल दोपहर 3:07 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा।


खिचड़ी पर्व की तिथि पर संशय

मकर संक्रांति को परंपरागत रूप से खिचड़ी पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन स्नान के बाद तिल, गुड़, चावल और वस्त्रों का दान किया जाता है।

हालांकि, इस बार चावल से बनी खिचड़ी के लिए संशय है। एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है। इसलिए विद्वानों का सुझाव है कि खिचड़ी पर्व 15 जनवरी (द्वादशी) को मनाना उचित रहेगा, ताकि पूजा और परंपरा दोनों का पालन सही ढंग से हो सके।


इस प्रकार, इस वर्ष मकर संक्रांति के पर्व में सूर्य का उत्तरायण, दुर्लभ एकादशी संयोग और खिचड़ी पर्व की तिथि सभी विशेष महत्व रखते हैं।

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