
बिहार के परिवहन विभाग में रिश्वतखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। बेगूसराय डीटीओ ऑफिस में वाहन ट्रांसफर के नाम पर खुलेआम वसूली किए जाने के मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। डीटीओ ऑफिस के बड़ा बाबू संजय और उसके कथित दलाल शिवानंद को 6 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया है।
बताया जा रहा है कि गाड़ी ट्रांसफर कराने के एवज में आवेदक से रिश्वत की मांग की गई थी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने पूरे मामले का सत्यापन कराया। आरोप सही पाए जाने पर टीम ने जाल बिछाया और दोनों को रिश्वत लेते ही दबोच लिया। इस मामले में निगरानी थाना कांड संख्या 63/26 दर्ज किया गया है।
लंबे समय से सक्रिय था दलालों का नेटवर्क
सूत्रों के अनुसार, बेगूसराय डीटीओ कार्यालय में लंबे समय से दलालों का नेटवर्क सक्रिय था। आम लोगों से फाइल आगे बढ़ाने, वाहन ट्रांसफर, फिटनेस और परमिट जैसे कार्यों के लिए अवैध वसूली की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। लोगों का आरोप था कि बिना पैसे दिए कार्यालय में काम कराना लगभग नामुमकिन हो गया था।
कार्रवाई के बाद ऑफिस में मचा हड़कंप
निगरानी टीम की कार्रवाई के बाद डीटीओ कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई कर्मी और कथित दलाल अचानक गायब हो गए। टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि रिश्वतखोरी का यह खेल केवल दो लोगों तक सीमित था या इसके पीछे पूरा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
बड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
सूत्रों की मानें तो निगरानी विभाग अब डीटीओ कार्यालय के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर सकता है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
आम लोगों में कार्रवाई को लेकर संतोष
इस कार्रवाई के बाद आम लोगों ने राहत की सांस ली है। लोगों का कहना है कि सरकारी दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार पर इसी तरह सख्त कार्रवाई की जरूरत है ताकि बिना रिश्वत के आम नागरिकों का काम हो सके।


