- 17 साल का वनवास खत्म: निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने नवादा के नरहट से बर्खास्त सिपाही विनोद कुमार यादव को दबोचा; 2009 से चल रहा था फरार, जाली दस्तावेजों का है मामला।
- फर्जीवाड़े की हद: बिहार सैन्य पुलिस (BMP-2) से बर्खास्त होने के बाद भी फर्जी कागज बनाकर दोबारा नौकरी पाई और अवैध वेतन उठाया; मूल फाइल गायब करने का भी है आरोप।
- जेल भेजा गया: धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की संगीन धाराओं में मामला दर्ज; पटना की विशेष अदालत ने भेजा न्यायिक हिरासत में।
द वॉयस ऑफ बिहार (नवादा/पटना)
कानून के हाथ कितने लंबे होते हैं, यह बात एक बार फिर साबित हो गई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) ने 17 साल पुराने भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक फरार आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह आरोपी कोई और नहीं, बल्कि बिहार पुलिस का ही एक पूर्व सिपाही है, जिसने फर्जीवाड़े की सारी हदें पार कर दी थीं।
नवादा के गंगटा गांव से हुई गिरफ्तारी
निगरानी की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर 15 फरवरी को नवादा (Nawada) जिले के नरहट थाना क्षेत्र (Narhat Police Station) के गंगटा गांव (Gangta Village) में छापेमारी की।
- आरोपी: यहां से विनोद कुमार यादव उर्फ जागेश्वर यादव (Vinod Kumar Yadav alias Jageshwar Yadav) को गिरफ्तार किया गया।
- पद: वह बिहार सैन्य पुलिस (BMP-2), डेहरी में सिपाही के पद पर तैनात था और लंबे समय से बर्खास्त चल रहा था।
फर्जी कागज से नौकरी और वेतन लूटा
विनोद कुमार यादव पर बेहद गंभीर आरोप हैं।
- मोडस ऑपरेंडी: बर्खास्त होने के बावजूद उसने अधिकारियों की मिलीभगत या धोखाधड़ी से जाली दस्तावेज (Fake Documents) तैयार किए और अपनी सेवा वापसी करवा ली।
- गबन: इतना ही नहीं, उसने फर्जी तरीके से सरकारी खजाने से अवैध वेतन भी उठाया। अपने गुनाह को छिपाने के लिए उसने विभाग की मूल फाइल (Original File) ही गायब कर दी थी।
कोर्ट ने भेजा जेल
इस मामले में 11 जून 2024 को आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल किया गया था, जिसके बाद कोर्ट ने अजमानतीय वारंट जारी किया था।
- धाराएं: आरोपी पर आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (जालसाजी), 120बी (साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धारा 7 और 13(2) लगाई गई है।
- पेशी: गिरफ्तारी के अगले दिन, यानी 16 फरवरी को उसे पटना स्थित निगरानी की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा (Judicial Custody) में जेल भेज दिया गया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ यह एक कड़ा संदेश है।


