बिहार के अररिया जिले के रानीगंज में चर्चित पत्रकार विमल कुमार उर्फ पप्पू हत्याकांड में गुरुवार को अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। एडीजे चतुर्थ रवि कुमार की अदालत ने दो आरोपियों को धारा 302/34 आईपीसी के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला घटना के करीब ढाई साल बाद आया है।
2023 में घर के बाहर हुई थी हत्या
18 अगस्त 2023 की सुबह करीब 5:15 बजे प्रेमनगर साधु आश्रम मोहल्ले स्थित अपने घर के दरवाजे पर विमल कुमार की बाइक सवार अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। वे एक दैनिक अखबार से जुड़े पत्रकार थे।
बताया गया कि विमल कुमार अपने छोटे भाई कुमार शशिभूषण उर्फ गब्बू की पूर्व में हुई हत्या के चश्मदीद गवाह थे। भाई के हत्यारों के खिलाफ चल रहे मुकदमे में गवाही देने से इनकार नहीं करने के कारण ही उनकी हत्या प्रतिशोध में की गई।
कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद
अदालत ने रानीगंज थाना क्षेत्र के कोशकापुर उत्तर वार्ड निवासी 23 वर्षीय माधव कुमार उर्फ लाट साहब और भरना मनुल्लाहपट्टी वार्ड निवासी 30 वर्षीय विपिन यादव को दोषी करार दिया।
दोनों को धारा 302/34 भादवि के तहत आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। साथ ही आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत तीन वर्ष की सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की अतिरिक्त सजा दी गई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास का प्रावधान भी रखा गया है। माधव कुमार 23 अगस्त 2023 से जेल में बंद है।
अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक प्रभा कुमारी ने प्रभावी दलीलें पेश कीं। रानीगंज थाना कांड संख्या 338/2023 और सत्रवाद संख्या 230/24 में अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोष सिद्ध किया।
परिवार ने कहा— न्याय की जीत
फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने इसे न्याय की जीत बताया। घटना के समय पूरे राज्य में पत्रकार संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था। परिवार का कहना है कि यह सजा अन्य आरोपियों के लिए भी कड़ा संदेश है।
अन्य आरोपियों पर सुनवाई जारी
मामले में कुल नौ आरोपी हैं। दो को सजा सुनाई जा चुकी है, जबकि अन्य आरोपियों— शैशव कुमार, उमेश यादव, क्रांति कुमार यादव, संतोष कुमार भारती उर्फ संतोष राम, रूपेश यादव, आशीष कुमार यादव और अर्जुन शर्मा— के खिलाफ सुनवाई जारी है।
पत्रकार सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह मामला बिहार में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। संवेदनशील मामलों में गवाही देने और पेशेवर जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। अदालत के इस फैसले से उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई और कड़ी सजा सुनिश्चित होगी।


