
मुजफ्फरपुर | बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के चर्चित रामबहादुर राय हत्याकांड में 26 वर्षों बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-2 दशरथ मिश्र की अदालत ने 12 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर ₹10,000 का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं भरने पर दो महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
खेत के विवाद में हुई थी हत्या
यह मामला हथौड़ी थाना क्षेत्र के झौआ गांव का है। 13 अगस्त 2000 को खेत की मेड़ काटने और धान उखाड़ने को लेकर हुए विवाद में किसान रामबहादुर राय पर भाले से हमला किया गया था। इस हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
12 आरोपी दोषी, एक बरी
अदालत ने:
- भूपेंद्र प्रसाद यादव और लोभित राय को हत्या (धारा 302) का दोषी ठहराया।
- सिकिंदर राय, सत्यनारायण राय, मुनिंद्र राय, नरेश राय, रामनाथ राय, अमृत राय, विनोद राय, मोहित राय, मनोज राय और देवनारायण राय को धारा 302/149 के तहत दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
वहीं राजीव कुमार को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान पांच आरोपियों की मौत
मुकदमे के दौरान पांच आरोपियों की मृत्यु हो गई, जिसके कारण उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई।
कोर्ट परिसर में हुआ विवाद
फैसला सुनाए जाने के बाद कोर्ट परिसर में दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच विवाद और मारपीट की घटना हुई। इसमें मृतक पक्ष के धर्मेंद्र यादव घायल हो गए। सूचना पर नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।
परिवार ने कहा- 26 साल बाद मिला न्याय
मृतक के भतीजे अरुण कुमार ने कहा कि परिवार ने 26 वर्षों तक न्याय के लिए संघर्ष किया। कई बार समझौते के लिए जमीन और पैसे का लालच दिया गया, लेकिन परिवार अपने फैसले पर अडिग रहा।
उन्होंने कहा:
“अदालत के फैसले से हमें आखिरकार न्याय मिला।”
यह फैसला बिहार के लंबे समय तक चले चर्चित आपराधिक मामलों में से एक में आया महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।


