बिहार के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल दानापुर–बिहटा एलिवेटेड रोड को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री ने परियोजना स्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि हर हाल में इसे अगस्त 2027 तक पूरा किया जाए।
यह परियोजना राजधानी पटना और आसपास के इलाकों में यातायात दबाव कम करने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने निर्माण कार्य की गति, गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की।
निर्माण में देरी नहीं चलेगी: मंत्री का सख्त संदेश
निरीक्षण के दौरान मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने स्पष्ट कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने (एनएचएआई) के अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिया कि सभी बाधाओं को समय रहते दूर किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाए, ताकि निर्माण के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
अधिकारियों ने दी प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी
निरीक्षण के दौरान एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारियों ने परियोजना की प्रगति रिपोर्ट पेश की। अधिकारियों के मुताबिक, दानापुर–बिहटा–कोईलवर खंड पर बन रही यह सड़क परियोजना कुल 25.081 किलोमीटर लंबी है।
इसमें शामिल हैं:
- लगभग 14.4 किमी एलिवेटेड कॉरिडोर
- करीब 2.28 किमी अतिरिक्त एलिवेटेड सेक्शन
- शेष हिस्से में एट-ग्रेड सड़क चौड़ीकरण और सुधार कार्य
अधिकारियों ने बताया कि परियोजना में बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग संरचनाएं तैयार की जा रही हैं, जिनमें सैकड़ों पिलर और स्पैन शामिल हैं।
1900 करोड़ से ज्यादा की लागत, तेजी से जारी काम
करीब 1969.39 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस परियोजना में अब तक उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। निर्माण कार्य के तहत:
- 389 फाउंडेशन
- 1618 पाइल
- 387 स्पैन
जैसी प्रमुख संरचनाओं पर काम किया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि कई हिस्सों में तेजी से काम चल रहा है और निर्धारित समयसीमा को ध्यान में रखते हुए निर्माण गतिविधियों को और तेज किया जा रहा है।
पटना के ट्रैफिक सिस्टम को मिलेगा बड़ा सहारा
दानापुर–बिहटा एलिवेटेड रोड के पूरा होने के बाद राजधानी पटना और आसपास के क्षेत्रों में जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर दानापुर, बिहटा और कोइलवर के बीच यात्रा समय कम होगा और भारी वाहनों की आवाजाही भी सुगम होगी।
क्या है आगे की चुनौती?
हालांकि परियोजना की प्रगति संतोषजनक बताई जा रही है, लेकिन भूमि अधिग्रहण, ट्रैफिक डायवर्जन और मौसम जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। ऐसे में सरकार और निर्माण एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती तय समयसीमा के भीतर काम पूरा करना है।
यह प्रोजेक्ट न सिर्फ पटना बल्कि पूरे दक्षिण-पश्चिम बिहार के लिए कनेक्टिविटी का नया अध्याय लिखने वाला माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह महत्वाकांक्षी योजना तय समय अगस्त 2027 तक पूरी हो पाती है या नहीं।


