टला बड़ा रेल हादसा: 15202 बगहा–पाटलिपुत्र इंटरसिटी टूटी पटरी पर बाल-बाल बची; लोको पायलट की सूझबूझ से बची सैकड़ों जानें

बेतिया/नरकटियागंज | 28 फरवरी, 2026: पश्चिम चंपारण जिले के नरकटियागंज–बेतिया रेलखंड पर शुक्रवार को एक भीषण रेल दुर्घटना होते-होते रह गई। 15202 बगहा–पाटलिपुत्र इंटरसिटी एक्सप्रेस एक टूटी हुई पटरी के ऊपर से गुजर गई, लेकिन लोको पायलट की त्वरित कार्रवाई और सतर्कता ने एक बड़े जान-माल के नुकसान को टाल दिया। घटना के बाद रेल महकमे में हड़कंप मच गया है और सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

कैसे टला ‘मौत का मंजर’? लोको पायलट का ‘सिक्स्थ सेंस’

​घटना उस समय की है जब ट्रेन कुमारबाग रेलवे स्टेशन से बेतिया की ओर रवाना हुई थी:

  • असामान्य झटका: स्टेशन से कुछ ही दूरी पर लोको पायलट को इंजन में एक जोरदार और असामान्य झटका महसूस हुआ।
  • इमरजेंसी ब्रेक: खतरे को भांपते हुए पायलट ने बिना देरी किए इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए और ट्रेन को वहीं रोक दिया।
  • हैरान करने वाला खुलासा: जब इंजन और शुरुआती एक-दो कोच क्षतिग्रस्त पटरी से गुजर चुके थे, तब जांच में पाया गया कि रेल पटरी एक जगह से पूरी तरह टूटी हुई थी।

डेढ़ घंटे तक थमी रही सांसें, मौके पर पहुंचे अधिकारी

​ट्रेन के रुकते ही यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई:

  1. मरम्मत कार्य: सूचना मिलते ही रेलवे के आला अधिकारी और पीडब्ल्यूआई (PWI) की टीम टेक्निकल स्टाफ के साथ मौके पर पहुँची।
  2. ट्रैक बहाली: करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद टूटी पटरी को दुरुस्त किया गया।
  3. देरी से रवाना: ट्रैक सुरक्षित घोषित होने के बाद ही ट्रेन को आगे के सफर के लिए रवाना किया गया।

जांच के घेरे में रेल सुरक्षा

​ट्रेन के गार्ड ने साफ तौर पर कहा कि यदि लोको पायलट उस झटके को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते, तो ट्रेन बेपटरी हो सकती थी और परिणाम भयानक हो सकते थे। फिलहाल रेलवे प्रशासन ने इस गंभीर लापरवाही की जांच शुरू कर दी है कि पटरी आखिर टूटी कैसे।

VOB का नजरिया: ‘किस्मत’ भरोसे चलती हमारी रेल?

हर बार हम लोको पायलट की सूझबूझ की तारीफ करके असली समस्या को पर्दे के पीछे धकेल देते हैं। सवाल यह है कि नरकटियागंज–बेतिया जैसे महत्वपूर्ण रेलखंड पर पटरी का टूटना पेट्रोलिंग (गश्त) टीम की विफलता नहीं है? क्या हम केवल बड़े हादसों का इंतजार कर रहे हैं या पटरियों के रखरखाव के पुराने ढर्रे को बदलेंगे? आज सैकड़ों परिवारों का चिराग जल रहा है, तो उसका श्रेय केवल उस सतर्क पायलट को जाता है, न कि सिस्टम को।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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