लालू-राबड़ी को दिल्ली कोर्ट से बड़ा झटका! ‘लैंड फॉर जॉब्स’ में 1600 दस्तावेजों वाली मांग खारिज; जज बोले— “उल्टी गंगा न बहाएं”

HIGHLIGHTS: राउज एवेन्यू कोर्ट में कानूनी दांव-पेंच नाकाम; ट्रायल में देरी की मंशा पर खिंचाई

  • बड़ा फैसला: पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद और राबड़ी देवी की 1600 ‘अनरिलायड’ (Unrelied) दस्तावेज मांगने वाली याचिका दिल्ली की अदालत ने खारिज की।
  • कोर्ट की टिप्पणी: विशेष जज विशाल गोगने ने सख्त लहजे में कहा— “इतने दस्तावेज मांगना न्यायिक प्रक्रिया को अस्त-व्यस्त करने और ट्रायल को लंबा खींचने की कोशिश है।”
  • अन्य आरोपी भी चित: लालू के पूर्व निजी सचिव आरके महाजन और रेलवे के जीएम महीप कपूर की याचिकाएं भी कोर्ट ने सिरे से नकार दीं।
  • क्या हैं ये दस्तावेज: जांच एजेंसी द्वारा जब्त किए गए वो कागजात जिन्हें चार्जशीट का हिस्सा नहीं बनाया गया, आरोपी उन्हें ही ट्रायल की तैयारी के लिए मांग रहे थे।

नई दिल्ली/पटना | 20 मार्च, 2026

​नौकरी के बदले जमीन (Land for Jobs) मामले में लालू परिवार की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के उस ‘दस्तावेजी पैंतरे’ को पूरी तरह से विफल कर दिया है, जिसे ट्रायल की रफ्तार रोकने की एक कोशिश माना जा रहा था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपियों को पहले ही इन कागजातों के निरीक्षण का पर्याप्त मौका मिल चुका है।

“उल्टी गंगा बहाने जैसा है यह कदम” — जज की तल्ख टिप्पणी

​अदालत ने सुनवाई के दौरान लालू परिवार के वकीलों की दलीलों को न्यायिक अनुशासन के खिलाफ माना:

  • प्रक्रिया होगी ध्वस्त: जज ने कहा कि अगर जांच एजेंसी द्वारा भरोसे में न लिए गए (Unrelied) सभी दस्तावेजों को एक साथ देने का आदेश दिया जाए, तो पूरी न्यायिक प्रक्रिया पटरी से उतर जाएगी।
  • देरी की रणनीति: कोर्ट ने माना कि 1600 से अधिक दस्तावेज मांगना मामले की सुनवाई को जानबूझकर लंबा खींचने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लग रहा है।
  • निरीक्षण का मौका: कोर्ट ने याद दिलाया कि कानूनी तौर पर आरोपियों को इन फाइलों को देखने का मौका पहले ही दिया जा चुका है, अब उनकी कॉपियां मांगकर वक्त जाया करना सही नहीं है।

सह-आरोपियों को भी नहीं मिली राहत

​लालू-राबड़ी के साथ-साथ इस केस में फंसे अन्य हाई-प्रोफाइल अधिकारियों को भी निराशा हाथ लगी है:

  1. आरके महाजन: लालू के तत्कालीन निजी सचिव ने 1 अहम दस्तावेज की मांग की थी, जिसे ठुकरा दिया गया।
  2. महीप कपूर: रेलवे के पूर्व जीएम ने 23 दस्तावेजों के लिए अर्जी लगाई थी, जिसे कोर्ट ने अनावश्यक करार दिया।

VOB का नजरिया: क्या ‘दस्तावेजों के जाल’ में उलझ गया है लैंड फॉर जॉब्स केस?

​बिहार की राजनीति के दिग्गज लालू प्रसाद यादव के लिए यह कानूनी झटका एक बड़े राजनीतिक संकेत की तरह है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि ‘लैंड फॉर जॉब्स’ मामले में ट्रायल अब अपने निर्णायक दौर की ओर बढ़ रहा है। कोर्ट का “उल्टी गंगा बहाना” वाला कमेंट यह साफ करता है कि न्यायपालिका अब ‘तारीख पर तारीख’ वाले रवैये को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

​लालू परिवार के लिए चुनौती यह है कि अगर यह मामला तेजी से ट्रायल पर गया, तो आने वाले महीनों में उनके लिए चुनावी और कानूनी मोर्चे पर मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दस्तावेजों की आड़ में बचाव पक्ष जिस राहत की उम्मीद कर रहा था, कोर्ट की इस सख्ती ने उस पर पानी फेर दिया है। अब देखना यह है कि क्या लालू परिवार इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देगा या सीधे ट्रायल का सामना करेगा।

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