बिहार के गया रेलवे पुलिस थाना के पूर्व थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह को 1.44 करोड़ रुपये के चर्चित सोना लूटकांड में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। आरोप है कि 21 नवंबर की रात हावड़ा–जोधपुर एक्सप्रेस ट्रेन में हुई लूट के वे मुख्य साजिशकर्ता (मास्टरमाइंड) थे। मामले की जांच रेल पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में रेल एसपी इनामुल हक के नेतृत्व में गठित एसआईटी कर रही थी। जांच में उनकी संलिप्तता सामने आने के बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई।
चलती ट्रेन में पुलिसकर्मी बने लुटेरे
यह मामला सामने आने के बाद रेल और बिहार पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। कोलकाता के एक सोना व्यापारी के कर्मचारी से चलती ट्रेन में सोने के बिस्कुट लूटे गए, और जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यात्रियों की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी ही अपराध में शामिल थे। अब इस कांड में तत्कालीन थानाध्यक्ष की गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
तकनीकी जांच से खुला राज, थानाध्यक्ष निकले मास्टरमाइंड
शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि इस लूटकांड का मास्टरमाइंड खुद थानाध्यक्ष होगा। जांच के दौरान सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड), मोबाइल टावर लोकेशन, तकनीकी साक्ष्य और अन्य सबूतों के आधार पर राजेश कुमार सिंह की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद उन्हें पिछले महीने निलंबित कर दिया गया था।
पटना में 8 घंटे की पूछताछ, फिर गिरफ्तारी
संदेह गहराने के बाद राजेश कुमार सिंह को पुलिस मुख्यालय, पटना बुलाकर विशेष टीम ने करीब 8 घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान वे कई सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर रेल न्यायालय, पटना में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
21 नवंबर को हुई थी वारदात
21 नवंबर को हावड़ा–जोधपुर एक्सप्रेस में सफर कर रहे कूरियर बॉय धनंजय शाश्वत से करीब एक किलो वजन के तीन सोने के बिस्कुट लूट लिए गए थे। आरोप था कि गया जीआरपी के चार जवान और दो सिविलियन जांच के नाम पर उसे रोके, सोना छीना और उसे ट्रेन से उतार दिया। धनंजय यह सोना कानपुर ले जा रहा था। घटना के बाद उसने अपने मालिक को जानकारी दी, जिसके बाद मामला दर्ज हुआ।
पहले कोलकाता, फिर गया में दर्ज हुआ केस
धनंजय के मालिक ने पहले कोलकाता रेल थाने में मामला दर्ज कराया था। बाद में केस पटना रेल एसपी कार्यालय पहुंचा और वहां से गया रेल थाना में अज्ञात अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। आरोप है कि शुरुआत में तत्कालीन थानाध्यक्ष ने मामले को दबाने की कोशिश की, लेकिन मामला तूल पकड़ने पर डीजीपी स्तर पर संज्ञान लिया गया।
खुद थानाध्यक्ष ने दर्ज की थी एफआईआर
हैरानी की बात यह है कि इस मामले में एफआईआर खुद तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने दर्ज की थी, लेकिन वरीय अधिकारियों की जांच में सच्चाई सामने आ गई। जांच रिपोर्ट आने के बाद पहले उन्हें निलंबित किया गया और फिर 31 दिसंबर की शाम गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
चार सिपाही भी निलंबित
इस मामले में गया जीआरपी के चार सिपाही—करण कुमार, अभिषेक चतुर्वेदी, रंजन कुमार और आनंद मोहन—को भी निलंबित किया गया है। रेल एसपी इनामुल हक ने थानाध्यक्ष की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
“सोना लूटकांड में पहले पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था। जांच में तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह की संलिप्तता सामने आई है। अब उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।”
— इनामुल हक, रेल एसपी, गया


