
कटिहार, 8 अप्रैल 2026: बिहार के कटिहार जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की जांच प्रक्रिया और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस महिला की हत्या के आरोप में एक युवक पिछले 10 महीनों से जेल में बंद था, वह महिला जिंदा बरामद हुई है। इस खुलासे के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
क्या है पूरा मामला
घटना कटिहार जिले के आजमनगर थाना क्षेत्र के कुशहा गांव की है। यहां की रहने वाली लक्खी देवी अचानक घर से लापता हो गई थी। महिला के गायब होने के बाद उसके भाई भीम यादव ने ससुराल पक्ष के कई लोगों पर हत्या का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया।
एफआईआर में चचेरे देवर राजेश यादव, उसकी पत्नी, पिता, भाई और अन्य पर गंभीर आरोप लगाए गए। आरोप था कि अवैध संबंधों के विवाद में परिवार ने मिलकर महिला की हत्या कर दी और शव को ठिकाने लगा दिया।
थर्ड डिग्री से कबूलवाया ‘गुनाह’
परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने जांच के दौरान राजेश यादव को हिरासत में लेकर थर्ड डिग्री दी और दबाव बनाकर उससे हत्या कबूल करवा ली। बताया गया कि दो दिनों तक लगातार मारपीट और मानसिक प्रताड़ना के बाद उससे जबरन कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए।
इसके बाद पुलिस ने दावा किया कि आरोपी ने महिला की हत्या कर शव को महानंदा नदी में फेंक दिया है। हालांकि कई दिनों तक खोजबीन के बावजूद नदी से कोई शव बरामद नहीं हुआ।
10 महीने में उजड़ गया परिवार
राजेश यादव के जेल जाने के बाद उसका पूरा परिवार बिखर गया। पुलिस कार्रवाई के डर से अन्य आरोपी गांव छोड़कर भागते रहे। इस दौरान उसके पांच बच्चों की पढ़ाई छूट गई और परिवार आर्थिक संकट में आ गया।
परिजनों का कहना है कि बिना किसी ठोस सबूत के एक निर्दोष व्यक्ति को जेल भेज दिया गया, जिससे उनकी जिंदगी पूरी तरह तबाह हो गई।
ऐसे हुआ चौंकाने वाला खुलासा
करीब 10 महीने बाद इस मामले में तब बड़ा मोड़ आया, जब परिवार को सूचना मिली कि लक्खी देवी जिंदा है और अपने प्रेमी के साथ रह रही है।
जानकारी के आधार पर परिजन संबंधित गांव पहुंचे और महिला को ढूंढ निकाला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई, जिसने महिला को अपने कब्जे में लेकर पूछताछ की।
प्रेमी के साथ भागने की बात कबूली
पूछताछ में लक्खी देवी ने बताया कि वह पिछले कई वर्षों से प्रेम राय नाम के युवक से प्रेम करती थी। परिवार के दबाव में उसकी शादी कहीं और कर दी गई थी।
पति की मौत के बाद वह अपने चार बच्चों को छोड़कर प्रेमी के साथ गुजरात चली गई, जहां दोनों पति-पत्नी की तरह रह रहे थे।
पुलिस ने महिला का बयान कोर्ट में धारा 164 के तहत दर्ज कराया, जिसमें उसने प्रेमी के साथ रहने की इच्छा जताई। इसके बाद उसे स्वतंत्र छोड़ दिया गया।
पुलिस पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं:
- बिना ठोस सबूत के हत्या का केस कैसे दर्ज हुआ?
- कथित कबूलनामे के आधार पर आरोपी को जेल क्यों भेजा गया?
- जांच के दौरान तथ्यात्मक पुष्टि क्यों नहीं की गई?
जांच के आदेश, आरोपी को मिलेगी राहत
कटिहार के एसपी शिखर चौधरी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम गठित करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों और शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही, कोर्ट में आवेदन देकर जेल में बंद युवक की रिहाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल अभी बाकी
इस मामले ने एक बार फिर न्याय व्यवस्था और पुलिस जांच पर भरोसे को झकझोर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो युवक 10 महीने तक बेगुनाह होकर जेल में रहा, उसकी जिंदगी के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
यह मामला न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि जांच प्रणाली में सुधार की जरूरत की भी एक बड़ी चेतावनी है।


