HIGHLIGHTS: बाहुबली विधायक की घर वापसी की तैयारी; मोकामा से पटना तक जश्न
- बड़ी खबर: पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार (19 मार्च, 2026) को जेडीयू विधायक अनंत सिंह की नियमित जमानत याचिका मंजूर की।
- हत्याकांड का मामला: विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान जन सुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या के आरोप में 4.5 महीने से जेल में थे बंद।
- जेल से जीत: बेऊर जेल में रहते हुए ही अनंत सिंह ने मोकामा सीट से आरजेडी उम्मीदवार वीणा देवी को 28,206 वोटों से हराया था।
- रिहाई का वक्त: कागजी कार्रवाई पूरी होते ही शुक्रवार (20 मार्च) या शनिवार तक अनंत सिंह जेल से बाहर आ सकते हैं।
पटना | 19 मार्च, 2026
मोकामा के बाहुबली विधायक और ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह के लिए आज का दिन खुशियां लेकर आया। विधानसभा चुनाव 2025 की गहमागहमी के बीच हुए दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट के जस्टिस रुद्र प्रकाश मिश्रा की पीठ ने उन्हें जमानत दे दी है। ₹15,000 के मुचलके पर मिली इस जमानत ने उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ कर दिया है।
क्या था वो ‘चुनावी’ हत्याकांड?
यह मामला 30 अक्टूबर 2025 का है, जब बिहार में पहले चरण के मतदान की तैयारी चल रही थी:
- हिंसक झड़प: मोकामा के तरतर गांव (बासावनचक) में चुनाव प्रचार के दौरान दो गुट आपस में भिड़ गए थे।
- मौत का रहस्य: आरोप लगा कि जन सुराज के समर्थक दुलारचंद यादव को पहले गोली मारी गई और फिर गाड़ी से कुचल दिया गया।
- PM रिपोर्ट का ‘ट्विस्ट’: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मौत गोली से नहीं, बल्कि किसी भारी चीज (गाड़ी) से लगी चोट के कारण ‘कार्डियो रेस्पिरेटरी फेलियर’ से हुई थी। इसी दलील को बचाव पक्ष ने कोर्ट में मजबूती से रखा।
शर्तों के साथ मिली आजादी: गवाहों को डराना पड़ेगा भारी
हाईकोर्ट ने जमानत तो दी है, लेकिन अनंत सिंह पर सख्त शर्तें भी लगाई हैं:
- गवाहों पर पहरा: यदि उन्होंने किसी गवाह को धमकाया या सबूतों से छेड़छाड़ की, तो जमानत तुरंत रद्द कर दी जाएगी।
- कोर्ट में हाजिरी: ट्रायल के दौरान उन्हें हर तारीख पर अदालत में पेश होना होगा।
- रिहाई की प्रक्रिया: बेऊर जेल प्रशासन को कोर्ट का आदेश मिलने के बाद रिलीज ऑर्डर जारी होगा, जिसके कल दोपहर तक होने की उम्मीद है।
VOB का नजरिया: मोकामा की ‘किलेबंदी’ और बाहुबल का भविष्य
अनंत सिंह की रिहाई केवल एक व्यक्ति की जेल से वापसी नहीं, बल्कि मोकामा की राजनीति में एक बड़े तूफान का संकेत है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि जेल में रहकर 28 हजार से ज्यादा वोटों से जीतना यह बताता है कि अनंत सिंह का अपने क्षेत्र में प्रभाव आज भी कायम है।
दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने जेल से ही जेडीयू के टिकट पर चुनाव जीता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर की थी। अब बाहर आने के बाद, क्या वे मोकामा के ‘विकास’ पर ध्यान देंगे या एक बार फिर अपने विरोधियों (सूरजभान सिंह गुट) के साथ सियासी वर्चस्व की जंग शुरू होगी? चुनावी रंजिश में हुई हत्या के दाग को धोना उनके लिए कानूनी तौर पर अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।


