HIGHLIGHTS: MP/MLA कोर्ट का बड़ा फैसला; 2020 के कोतवाली थाना कांड में पूर्व विधायक अजीत शर्मा हुए दोषमुक्त
- बड़ी जीत: एसीजेएम प्रथम सह विशेष न्यायाधीश (MP/MLA) धर्मेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने सुनाया फैसला।
- कोविड प्रोटोकॉल: महामारी अधिनियम और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज था मामला; साक्ष्य नहीं होने पर हुए बरी।
- अभियोजन की हार: सुनवाई के दौरान अभियोजन ने पेश किए थे 4 गवाह, लेकिन कोर्ट में साबित नहीं हो सके आरोप।
- विधिक टीम: वरीय अधिवक्ता ऋषिकेश चौधरी के नेतृत्व में बचाव पक्ष ने रखी मजबूत दलील; साक्ष्य की कमी बनी ढाल।
- VOB इनसाइट: 2020 के लॉकडाउन के दौरान राजनीतिक गतिविधियों और नियमों के उल्लंघन के आरोपों से अब पूर्व विधायक पूरी तरह मुक्त।
भागलपुर | 24 मार्च, 2026
भागलपुर के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक अजीत शर्मा के लिए आज का दिन कानूनी मोर्चे पर बड़ी राहत लेकर आया है। भागलपुर के विशेष MP/MLA कोर्ट ने वर्ष 2020 में कोविड-19 प्रोटोकॉल के उल्लंघन से जुड़े एक मामले में उन्हें साक्ष्य के अभाव में ससम्मान बरी कर दिया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और पुख्ता सबूत पेश करने में विफल रहा।
मामला 2020 का: महामारी और सियासी जंग
यह मामला कोतवाली थाना कांड संख्या 623/2020 (GR-4046/2020) से संबंधित है। वर्ष 2020 में जब पूरी दुनिया और देश कोरोना महामारी की चपेट में था, तब नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर प्रशासन ने अजीत शर्मा के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी। उन पर आईपीसी की धारा 188 (लोक सेवक के आदेश की अवहेलना), 269, 270, 271 (संक्रमण फैलाने वाली लापरवाही) और महामारी रोग अधिनियम की धारा 3 के तहत आरोप लगाए गए थे।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपनी ओर से कुल 4 गवाहों को साक्षी के रूप में कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया। हालांकि, बचाव पक्ष के वकीलों ने जिरह के दौरान इन गवाहों के बयानों और पुलिस की थ्योरी में कई तकनीकी कमियों को उजागर किया। अंततः, न्यायालय ने माना कि केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता और साक्ष्य की भारी कमी को देखते हुए उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
VOB डेटा चार्ट: केस प्रोफाइल (MP/MLA-02/2024)
- अभियुक्त: अजीत शर्मा (पूर्व विधायक, भागलपुर)
- न्यायालय: ACJM 1st सह विशेष न्यायाधीश MP/MLA श्री धर्मेंद्र कुमार पांडेय।
- संबंधित थाना: कोतवाली P.S. (भागलपुर)।
- प्रमुख धाराएं: 188, 269, 270, 271 (IPC) एवं 3 एपिडेमिक डिजीज एक्ट।
- गवाहों की संख्या: 04 (अभियोजन की ओर से)।
- बचाव पक्ष के वकील: वरीय अधिवक्ता ऋषिकेश चौधरी, रंजीत कुमार, अनुज कुमार और रोहित शंकर।
- अभियोजन पक्ष के वकील: अधिवक्ता सिद्धार्थ सारथी।
- फैसला: साक्ष्य के अभाव में पूर्णतः बरी।
VOB का नजरिया: क्या ‘कोविड केस’ अब केवल कागजी रह गए हैं?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि पूर्व विधायक अजीत शर्मा की यह जीत केवल एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि उस समय के कई ‘कानूनी पेच’ की हकीकत बयां करती है।
- कानूनी बारीकियां: 2020 के दौरान देशभर में नेताओं पर कोविड उल्लंघन के सैकड़ों केस दर्ज हुए थे। अजीत शर्मा के मामले में कोर्ट का फैसला यह दर्शाता है कि पुलिस जांच अक्सर जल्दबाजी में या बिना पर्याप्त सबूतों के की गई थी।
- MP/MLA कोर्ट की तत्परता: विशेष न्यायालयों के गठन का उद्देश्य ही जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा करना है। साक्ष्य की कमी होने पर पूर्व विधायक को बरी करना न्यायिक निष्पक्षता को दर्शाता है।
- सियासी असर: भागलपुर की राजनीति में अपनी मजबूत पैठ रखने वाले अजीत शर्मा के लिए यह ‘क्लीन चिट’ एक बड़ी मनोवैज्ञानिक जीत है, जिससे विरोधियों के उन आरोपों पर विराम लग गया है जो उन्हें ‘नियम तोड़ने वाला’ बताते थे।
निष्कर्ष: सुशासन और न्याय की जीत
पूर्व विधायक अजीत शर्मा के समर्थकों में इस फैसले के बाद भारी उत्साह देखा जा रहा है। कोर्ट परिसर से बाहर निकलने के बाद वकीलों की टीम ने इसे सत्य की जीत बताया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ हर उस कानूनी खबर पर अपनी पैनी नजर रखता है जो हमारे प्रदेश के सुशासन और न्याय व्यवस्था से जुड़ी होती है।


