IGIMS पटना में बड़ी चिकित्सा सफलता, 60 वर्षीय मरीज के पेट से 8 किलो का दुर्लभ ट्यूमर निकाला

इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS), पटना में सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की टीम ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने 60 वर्षीय मरीज के पेट से करीब 8 किलो वजनी एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल लिया है। करीब तीन घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत अब स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है।

बेगूसराय से रेफर होकर आया था मरीज

IGIMS के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि बेगूसराय निवासी मरीज पेट फूलने, अपच और बार-बार उल्टी की शिकायत लेकर इलाज के लिए पहुंचा था। प्रारंभिक जांच के बाद कराए गए सीटी स्कैन में पेट के अंदर एक बेहद बड़े ट्यूमर की पुष्टि हुई, जिसके बाद मरीज को बेहतर इलाज के लिए IGIMS रेफर किया गया।

ऑपरेशन के दौरान रही गंभीर चुनौती

डॉ. मंडल के अनुसार, यह ट्यूमर पेट की प्रमुख धमनियों और नसों से बुरी तरह चिपका हुआ था, जिससे सर्जरी बेहद जोखिमपूर्ण हो गई थी। इस चुनौती को देखते हुए सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, पल्मोनरी मेडिसिन और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञों के साथ संयुक्त रणनीति बनाई गई।

सिर-धड़ जैसी आकृति वाला ट्यूमर

सर्जरी के दौरान बाहर निकाला गया ट्यूमर देखने में सिर, गर्दन और धड़ जैसी आकृति का प्रतीत हो रहा था। यह छोटी आंत, बड़ी आंत और पेट की मुख्य रक्त नलिकाओं से खतरनाक तरीके से जुड़ा हुआ था। बावजूद इसके, विशेषज्ञों की टीम ने करीब तीन घंटे की कड़ी मेहनत के बाद ट्यूमर को पूरी तरह सुरक्षित निकाल लिया।

दुनिया में बेहद दुर्लभ श्रेणी का मामला

डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि यह ट्यूमर अत्यंत दुर्लभ श्रेणी का है, जिसके मामले पूरी दुनिया में बहुत कम देखने को मिलते हैं। प्रारंभिक जांच में इसे लिपोसारकोमा (फैट टिश्यू से उत्पन्न होने वाला कैंसर) माना जा रहा है, हालांकि इसकी अंतिम पुष्टि हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी।

उन्होंने कहा,
“रिपोर्ट के आधार पर आगे की उपचार योजना तय की जाएगी। ऐसे ट्यूमर का निदान और उपचार चिकित्सा विज्ञान के लिए हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है। इस तरह की सफल सर्जरी संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।”

डॉक्टरों की टीम को मिली सराहना

यह जटिल ऑपरेशन डॉ. मनीष मंडल के नेतृत्व में डॉ. साकेत कुमार, डॉ. अभिमन्यु, डॉ. दानिश, डॉ. सुनीत और एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. नितिन की टीम द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।
IGIMS के निदेशक डॉ. बिंदे कुमार और डीन डॉ. ओम कुमार ने सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग की पूरी टीम को इस ऐतिहासिक सफलता के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन न केवल मरीज के लिए नया जीवन देने वाला है, बल्कि भविष्य में ऐसे दुर्लभ मामलों के इलाज के लिए संस्थान के डॉक्टरों के लिए प्रेरणा बनेगा।


 

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