बिहार के रोहतास जिले में न्यायालय की अवहेलना को लेकर बड़ा और सख्त फैसला सामने आया है। जिला जज-4 अनिल कुमार की अदालत ने जिलाधिकारी कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जिलाधिकारी द्वारा बार-बार न्यायालय के आदेशों की अनदेखी की जा रही है, जो न्यायिक प्रक्रिया के साथ “हाइड एंड सीक” खेलने जैसा है।
जुर्माना लगाने के बावजूद नहीं हुआ अनुपालन
अदालत ने अपने आदेश में बताया कि इस मामले में 23 दिसंबर 2025 को पहले ही जिलाधिकारी पर आदेश की अवहेलना के लिए 10 हजार रुपये का हर्जाना लगाया जा चुका है। इसके बावजूद न तो जुर्माने की राशि जमा की गई और न ही निष्पादन की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई की गई। इससे अदालत को कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जुर्माने की राशि और निर्गत रकम की पूरी वसूली होने तक कुर्की की कार्रवाई जारी रहेगी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा—
“पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद आदेशों का पालन नहीं किया गया। यह न्यायालय के साथ लुका-छिपी का खेल है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”
क्या है पूरा मामला
यह मामला दावा वाद संख्या 113/2003 से जुड़ा है, जो वर्ष 2003 में दाखिल किया गया था। उस समय न्यायालय ने आवेदक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी, सासाराम को 3 लाख 43 हजार रुपये भुगतान करने का आदेश दिया था। साथ ही यह निर्देश भी दिया गया था कि बीमा कंपनी पहले आवेदक को राशि अदा करे और बाद में वाहन स्वामी से वसूली कर सकती है।
इसके अनुपालन में ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने वर्ष 2014 में इजराय वाद संख्या 01/2014 के तहत वाहन स्वामी संजय कुमार गुप्ता के खिलाफ निष्पादन वाद दायर किया। लेकिन बीते करीब 11 वर्षों से निर्णीत राशि की वसूली नहीं हो सकी।
जिलाधिकारी से मांगी गई थी रिपोर्ट
न्यायालय ने बीमा कंपनी के माध्यम से राशि की वसूली को लेकर जिलाधिकारी, रोहतास से रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन अदालत के अनुसार, इस दिशा में कानूनी कार्रवाई में गंभीर शिथिलता बरती गई। आदेशों के बावजूद न तो वसूली हुई और न ही अदालत को संतोषजनक रिपोर्ट दी गई।
पुलिस बल उपलब्ध कराने का निर्देश
अदालत ने नगर थाना अध्यक्ष को आदेश दिया है कि कुर्की की कार्रवाई के लिए नाजिर को आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए। साथ ही पूरी प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर न्यायालय को सूचित करने का भी निर्देश दिया गया है।
प्रशासनिक महकमे में हलचल
इस आदेश के बाद जिला प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। न्यायालय के इस अभूतपूर्व आदेश को लेकर कानूनी और प्रशासनिक हलकों में व्यापक चर्चा हो रही है।
कोर्ट का स्पष्ट संदेश
न्यायालय ने साफ संकेत दिया है कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे संबंधित पद कितना ही उच्च क्यों न हो।


