पटना / राजनीतिक डेस्क: बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद रविवार को जन सुराज पार्टी ने अपने सभी विधानसभा प्रत्याशियों के साथ पटना के शेखपुरा हाउस में समीक्षा बैठक की। बैठक में चुनाव हार के कारणों, रणनीति में हुई कमी और आगामी राजनीतिक दिशा पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने की, जबकि पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) भी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान उम्मीदवारों ने हार की मुख्य वजह बताते हुए कहा कि एनडीए ने चुनाव को योजनाबद्ध तरीके से प्रभावित किया, महिलाओं के खातों में पैसे भेजकर वोट का ध्रुवीकरण किया गया और जंगलराज का भय फैला कर जनमत को मोड़ दिया गया।
उम्मीदवारों का आरोप — “महिलाओं के खाते में भेजे गए 10 हजार रुपये ने चुनावी माहौल बदल दिया”
उम्मीदवारों ने कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भी महिलाओं के खातों में 10 हजार रुपये भेजे गए और इसे “सीड मनी” बताकर प्रचारित किया गया।
बैठक में उपस्थित कई प्रत्याशियों ने आरोप लगाया:
- जीविका संगठन की दीदियाँ घर-घर जाकर कहती रहीं कि
“यह पैसा लौटाना नहीं है, और चुनाव बाद खाते में 2–2 लाख रुपये आएंगे।” - इसके बदले महिलाओं से नीतीश कुमार के लिए वोट देने की अपील की गई।
- मतदान केंद्रों के पास भी जीविका से जुड़ी महिलाओं की मौजूदगी देखी गई।
- कई स्थानों पर वृद्ध और असहाय महिलाओं की ईवीएम का बटन तक दबा दिया गया।
उम्मीदवारों के अनुसार, यह रणनीति निर्णायक साबित हुई और मतदाताओं का झुकाव अंतिम समय पर बदल गया।
“जंगलराज” का भय भी फैलाया गया — उम्मीदवारों का आरोप
कई प्रत्याशियों ने बताया कि बाहरी लोग बड़ी संख्या में जिलों में भेजे गए, जो घर-घर जाकर यह कहते दिखे कि —
“यदि प्रशांत किशोर की बातों पर शिक्षा, बेरोजगारी, पलायन के मुद्दे को देखकर वोट दिया गया तो बिहार में फिर 20 साल पुराना जंगलराज वापस आ जाएगा।”
उम्मीदवारों का कहना था कि इस मनोवैज्ञानिक दांव और अफवाहों ने जनता के वोटिंग पैटर्न पर प्रभाव डाला और अंततः जन सुराज की वोटों वाली मजबूत लहर कमजोर पड़ गई।
पार्टी आगे क्या कदम उठाएगी — रणनीति पर भी चर्चा
बैठक में यह फैसला हुआ कि:
- चुनाव के दौरान सामने आई बाधाओं का विश्लेषण कर समाधान तैयार किया जाएगा।
- जन सुराज का संगठन गांव और बूथ स्तर पर और मजबूत किया जाएगा।
- आने वाले लोकसभा और निकाय चुनाव, दोनों के लिए पार्टी अब पहले से बेहतर तैयारी करेगी।
बैठक में मौजूद प्रमुख नेता
समीक्षा बैठक में कई प्रमुख चेहरे शामिल रहे, जिनमें —
- गणितज्ञ के.सी. सिन्हा
- पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना
- पूर्व विधान पार्षद रामबलि चंद्रवंशी
- महासचिव सुभाष सिंह कुशवाहा
- प्रवक्ता सैयद मसीह उद्दीन
इसके अलावा आर.के. मिश्रा, अरविंद सिंह, एन.पी. मंडल, ए.के. दिव्वेदी, जे.पी.एन. सिंह, जीतेंद्र मिश्रा, सरवर अली, रामलखन दांगी, प्रीतम सिंह, आर.एन. सिंह और रीतेश पांडेय सहित राष्ट्रीय परिषद के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर संदेश स्पष्ट — “लड़ाई खत्म नहीं, शुरू हुई है”
बैठक में अधिकांश उम्मीदवारों का एक ही मत रहा —
“जन सुराज ने मुद्दों की राजनीति की, लेकिन विपक्ष ने आर्थिक प्रलोभन और भय की राजनीति से माहौल पलट दिया।”
बैठक में यह भी साफ संकेत दिया गया कि पार्टी आने वाले दिनों में और ज़ोरदार तरीके से मैदान में उतरेगी और बिहार की राजनीति में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करेगी।
