भागलपुर: समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में बाल संरक्षण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से भागलपुर में प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी-सह-संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आई ट्रिपल सी (I-CCC) सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन भागलपुर प्रमंडल के आयुक्त अवनीश कुमार सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर जिला पदाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, पुलिस अधीक्षक (बांका) उपेंद्रनाथ वर्मा, नगर पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र कुमार सिंह, उप विकास आयुक्त उपेंद्र सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रंजीता कुमारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बाल अधिकारों के चार स्तंभों पर विशेष चर्चा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयुक्त ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं अधिकारियों को सीखने और समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने बताया कि बाल अधिकारों की अवधारणा चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—
- सर्वाइवल (जीवन)
- प्रोटेक्शन (सुरक्षा)
- डेवलपमेंट (विकास)
- पार्टिसिपेशन (भागीदारी)
इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नीतियों और योजनाओं का क्रियान्वयन करना बेहद जरूरी है।
दंडात्मक नहीं, सुधारात्मक दृष्टिकोण की जरूरत
आयुक्त ने जोर देते हुए कहा कि बाल संरक्षण के मामलों में केवल दंडात्मक व्यवस्था से काम नहीं चलेगा, बल्कि सुधारात्मक और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कानून से संघर्ष कर रहे बच्चों (CCL) और देखरेख व संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों (CNCP) को मुख्यधारा में लाने के लिए समन्वित प्रयास जरूरी हैं।
पुलिस की भूमिका को बताया अहम
कार्यक्रम में पुलिस की भूमिका को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया। आयुक्त ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को बाल अधिकारों से जुड़े कानूनों की गहन जानकारी रखते हुए संवेदनशीलता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।
“बच्चे ही देश का भविष्य”
जिला पदाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों का सही पालन-पोषण और सुरक्षित वातावरण उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव है।
उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को उचित अवसर और माहौल मिले, तो वे समाज और देश के विकास में अहम योगदान दे सकते हैं। इसके लिए सभी को समावेशी दृष्टिकोण अपनाना होगा।
हर बच्चे को मिले समान अवसर
पुलिस अधीक्षक (बांका) ने कहा कि यह राज्य की जिम्मेदारी है कि हर बच्चे को विकास के समान अवसर मिले।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी बच्चे को उपेक्षित नहीं किया जाना चाहिए और सभी को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का अवसर मिलना चाहिए।
विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान यूनिसेफ के स्टेट कोऑर्डिनेटर अजय झा ने उपस्थित अधिकारियों को बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से अधिकारियों को संवेदनशीलता और समन्वय की आवश्यकता को समझाया।
अधिकारियों ने साझा किए विचार
नगर पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त सहित अन्य अधिकारियों ने भी अपने विचार रखे और बाल संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
निष्कर्ष:
भागलपुर में आयोजित यह गोष्ठी बाल अधिकारों के संरक्षण और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा और बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।


