केयर लीवर्स के लिए बड़ी पहल: अब आसान होगा आत्मनिर्भर बनने का रास्ता.. समाज कल्याण सचिव बन्दना प्रेयषी ने दिए त्वरित समन्वय के निर्देश

पटना | 2 फरवरी 2026

बिहार में बाल देखरेख संस्थानों से बाहर निकलकर स्वतंत्र जीवन शुरू करने वाले केयर लीवर्स के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को समाज कल्याण विभाग की सचिव श्रीमती बन्दना प्रेयषी की अध्यक्षता में बिहार केयर लीवर्स एलायंस (BCLA) के साथ अहम बैठक हुई। इसमें यूनिसेफ, राज्य बाल संरक्षण समिति और समाज कल्याण निदेशालय के अधिकारी भी मौजूद रहे।

बैठक का मकसद साफ था—

केयर लीवर्स को सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भर भविष्य देना।


कौन होते हैं केयर लीवर्स?

किशोर न्याय अधिनियम, 2015 और मिशन वात्सल्य योजना के तहत बाल देखरेख संस्थानों में रहने वाले वे बच्चे, जो 18 साल पूरे होने के बाद संस्थानों से बाहर निकलते हैं, उन्हें केयर लीवर्स कहा जाता है। यही वह मोड़ होता है, जब उन्हें अचानक खुद के दम पर जीवन संभालना पड़ता है।


केयर लीवर्स ने खुद रखी अपनी बात

बैठक में केयर लीवर्स ने आगे आकर अपनी जमीनी सच्चाइयां साझा कीं। उन्होंने बताया कि संस्थान से बाहर आने के बाद—

  • आधार, वोटर आईडी, राशन कार्ड, हेल्थ कार्ड बनवाना कठिन
  • दस्तावेज़ों के बिना शिक्षा और रोजगार में बाधा
  • सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी

इन चुनौतियों ने उनके लिए आत्मनिर्भरता की राह मुश्किल बना दी है।


सचिव के सख्त निर्देश

इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए सचिव बन्दना प्रेयषी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि—

  • केयर लीवर्स के दस्तावेज़ प्राथमिकता पर बनवाए जाएं
  • विभिन्न विभागों के बीच समन्वय तंत्र मजबूत हो
  • सहायता प्रक्रिया सरल और समयबद्ध हो

उन्होंने कहा कि कोई भी केयर लीवर केवल कागज़ी अड़चनों के कारण अपने सपनों से वंचित न रहे।


BCLA को मिलेगा नया मंच

सचिव ने BCLA को एक सामाजिक संगठन के रूप में पंजीकृत कराने की सलाह दी और सभी केयर लीवर्स को इसमें शामिल होने का आह्वान किया।
उन्होंने पीयर ग्रुप मेंटरिंग पर जोर देते हुए कहा—

“आप एक-दूसरे के अनुभव से सीखें और एक-दूसरे का सहारा बनें।”


कौशल से आत्मनिर्भरता तक

सरकार अब केयर लीवर्स को—

  • वन स्टॉप सेंटर से जोड़ने
  • महिला एवं बाल विकास निगम के कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल करने
    के निर्देश दे रही है, ताकि उन्हें रोजगार और सम्मानजनक जीवन का अवसर मिल सके।

संदेश साफ है

अब केयर लीवर्स अकेले नहीं हैं। सरकार, समाज और संगठन—तीनों मिलकर उन्हें सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर ले जाने के लिए एकजुट हो रहे हैं।

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