बिहार में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार: छात्र-शिक्षक अनुपात राष्ट्रीय औसत से बेहतर

पटना, 7 जुलाई।बिहार सरकार की सतत पहल और व्यापक शिक्षक बहाली अभियान के चलते राज्य के सरकारी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। शिक्षा विभाग के अनुसार, वर्तमान में यह अनुपात घटकर प्रति शिक्षक 28 छात्र हो गया है, जो कि राष्ट्रीय औसत से भी बेहतर स्थिति दर्शाता है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए बीते तीन वर्षों में 3 लाख से अधिक शिक्षकों की बहाली की गई है। इसी का परिणाम है कि आज सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर और संसाधनों की उपलब्धता में बड़ा बदलाव आया है।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की रिपोर्ट क्या कहती है?

2023–24 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में विभिन्न स्तरों पर छात्र-शिक्षक अनुपात इस प्रकार है:

  • कक्षा 1 से 5: प्रति शिक्षक 32 छात्र
  • कक्षा 6 से 8: प्रति शिक्षक 19 छात्र
  • कक्षा 9 से 10: प्रति शिक्षक 30 छात्र
  • कक्षा 11 से 12: प्रति शिक्षक 31 छात्र

जबकि समेकित रूप से कक्षा 1 से 12 तक का औसत PTR 28 है।
वहीं, राष्ट्रीय औसत की बात करें तो यह प्राथमिक स्तर पर 40:1 और उच्च कक्षाओं में 30:1 है।


2015-16 से अब तक कितनी बदली स्थिति?

2015-16 में बिहार के प्रारंभिक स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 89:1 था।
इसके बाद 2020-21 में यह घटकर 47:1 हुआ और अब 2024-25 तक यह 28:1 तक पहुंच गया है।
यह न केवल एक संख्यात्मक सुधार है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी एक निर्णायक बदलाव को दर्शाता है।


शिक्षकों की संख्या और आगे की योजना

वर्तमान में बिहार के सरकारी स्कूलों में लगभग 6 लाख 60 हजार शिक्षक कार्यरत हैं, और कक्षा 1 से 12 तक 2 करोड़ 13 लाख से अधिक छात्र नामांकित हैं।
2024 में BPSC के माध्यम से चयनित 1.20 लाख से अधिक नए शिक्षकों को नियुक्ति-पत्र भी दिया जा चुका है।


क्या बोले शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारी?

डॉ. एस. सिद्धार्थ, अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग, बिहार सरकार ने कहा:

“शिक्षकों की लगातार बहाली से छात्र-शिक्षक अनुपात में भारी सुधार हुआ है। यह अब राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। आने वाले महीनों में और शिक्षकों की नियुक्ति से यह अनुपात और बेहतर होगा।”


बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे ये सुधार न केवल राज्य के छात्रों के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में अहम कदम हैं, बल्कि यह अन्य राज्यों के लिए एक सकारात्मक उदाहरण भी प्रस्तुत करते हैं। PTR में सुधार से शिक्षकों पर कार्यभार कम हुआ है, जिससे वे छात्रों को अधिक समय और ध्यान दे पा रहे हैं।


 

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