
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में रहने वाले लाखों प्रवासी मजदूरों और किरायेदारों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अब रसोई गैस पाने के लिए नियमित एलपीजी कनेक्शन होना जरूरी नहीं रहेगा। दिल्ली सरकार ने नई व्यवस्था लागू करते हुए घोषणा की है कि केवल वैध पहचान पत्र दिखाकर 5 किलोग्राम का छोटा गैस सिलेंडर लिया जा सकेगा।
बिना कनेक्शन के भी मिलेगा सिलेंडर
दिल्ली सरकार के खाद्य, आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अनुसार, अब ऐसे लोग जिनके पास स्थायी पता या रेगुलर LPG कनेक्शन नहीं है, वे भी आसानी से गैस सिलेंडर प्राप्त कर सकेंगे।
इसके लिए:
- आधार कार्ड या कोई अन्य वैध पहचान पत्र दिखाना होगा
- 5 किलो का छोटा सिलेंडर तुरंत उपलब्ध कराया जाएगा
यह सुविधा खासतौर पर प्रवासी मजदूरों और किराये के मकानों में रहने वाले लोगों के लिए शुरू की गई है
प्रवासी मजदूरों को बड़ी राहत
दिल्ली में काम की तलाश में आने वाले मजदूरों को अक्सर गैस कनेक्शन लेने में दिक्कत होती थी। एड्रेस प्रूफ की कमी के कारण उन्हें खाना बनाने में काफी परेशानी होती थी।
नई व्यवस्था से:
- उन्हें अब कनेक्शन के झंझट से मुक्ति मिलेगी
- कम समय में गैस सिलेंडर मिल सकेगा
- रोजमर्रा की जिंदगी आसान होगी
सरकार का दावा: ईंधन की कोई कमी नहीं
प्रेस वार्ता के दौरान अधिकारियों ने साफ किया कि दिल्ली में किसी भी तरह का ईंधन संकट नहीं है।
उन्होंने बताया:
- एलपीजी, पीएनजी, पेट्रोल और डीजल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं
- कालाबाजारी रोकने के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है
- शिकायतों के त्वरित समाधान की व्यवस्था की गई है
PNG को बढ़ावा देने पर जोर
सरकार अब पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
- पहले रोज 1000 नए कनेक्शन दिए जा रहे थे
- अब इसे बढ़ाकर 3000 प्रतिदिन कर दिया गया है
- जिन क्षेत्रों में PNG उपलब्ध है, वहां लोगों को इसे अपनाने की सलाह दी गई है
सरकार का मानना है कि PNG अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प है।
सही कैटेगरी में कनेक्शन जरूरी
दिल्ली में फिलहाल करीब 56 लाख घरेलू LPG कनेक्शन हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अपने कनेक्शन की सही श्रेणी सुनिश्चित करें, ताकि:
- घरेलू गैस का व्यावसायिक दुरुपयोग रोका जा सके
- जरूरतमंद लोगों तक सब्सिडी का लाभ सही तरीके से पहुंचे
दिल्ली सरकार का यह फैसला खासकर उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है जो बिना स्थायी पते के शहर में रहकर काम कर रहे हैं। 5 किलो सिलेंडर की यह सुविधा न सिर्फ जीवन को आसान बनाएगी, बल्कि ऊर्जा तक पहुंच को भी ज्यादा सुलभ करेगी।
आने वाले समय में यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।


