खुसरूपुर में नशीली दवाओं के ‘सिंडिकेट’ पर कड़ा प्रहार: पटना-बख्तियारपुर फोरलेन पर 2088 बोतल कोडिन सिरप के साथ तस्कर गिरफ्तार

खुसरूपुर/पटना। बिहार में शराबबंदी के बाद नशे के वैकल्पिक रास्तों के रूप में उभर रहे ‘कोडिन आधारित कफ सिरप’ के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस और औषधि विभाग ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पटना जिले के खुसरूपुर थाना क्षेत्र में रविवार, 5 अप्रैल 2026 को पुलिस ने एक सुनियोजित जाल बिछाकर नशीली दवाओं के एक बड़े खेप को पकड़ा है। खुसरूपुर थाना पुलिस और औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने पटना-बख्तियारपुर फोरलेन पर कटौना के समीप एक ऑटो को रोककर तलाशी ली, जिसमें से 2088 बोतल प्रतिबंधित कफ सिरप बरामद किया गया। यह कार्रवाई केवल एक जब्ती तक सीमित नहीं रही, बल्कि गिरफ्तार तस्कर की निशानदेही पर पटना सिटी स्थित एक गुप्त गोदाम पर भी छापेमारी की गई है। सोमवार, 6 अप्रैल 2026 की यह रिपोर्ट बिहार के शहरी और ग्रामीण इलाकों में फैल रहे नशीली दवाओं के इस ‘धीमे जहर’ और उसके अंतर-जिला नेटवर्क की भयावह तस्वीर पेश करती है।

फोरलेन पर घेराबंदी: कटौना के पास धरा गया ‘राजीव’

​खुसरूपुर पुलिस को रविवार की सुबह एक पुख्ता गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि नालंदा की ओर से एक ऑटो में भारी मात्रा में मादक पदार्थों की तस्करी की जा रही है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए थानाध्यक्ष संजीव सिंह ने तुरंत औषधि विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया और एक संयुक्त टीम का गठन किया। टीम ने पटना-बख्तियारपुर फोरलेन पर कटौना के पास रणनीतिक नाकेबंदी की।

​जैसे ही संदिग्ध ऑटो वहाँ पहुँचा, पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया। चालक ने भागने की कोशिश की, लेकिन टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। जब ऑटो की पिछली सीटों और डाले की तलाशी ली गई, तो उसमें छिपाकर रखी गई बोरियों से कफ सिरप की बोतलें बरामद होने लगीं। गिनती करने पर कुल 2088 बोतलें पाई गईं, जिनमें उच्च मात्रा में कोडिन (Codeine) मौजूद था। पुलिस ने मौके से तस्कर को गिरफ्तार कर लिया, जिसकी पहचान नालंदा जिले के तेलमर थाना अंतर्गत नूननगर भोजपुर निवासी विद्यानंद राम के पुत्र राजीव कुमार के रूप में हुई है।

पटना सिटी के गोदाम तक पहुँची जांच की आंच

​गिरफ्तार राजीव कुमार से जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया। उसने बताया कि यह खेप केवल एक हिस्सा थी और इसका मुख्य भंडारण पटना सिटी के एक गोदाम में किया गया था। थानाध्यक्ष संजीव सिंह के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने बिना वक्त गंवाए पटना सिटी के चिन्हित गोदाम पर छापेमारी की। वहाँ से भी भारी मात्रा में कफ सिरप बरामद किए गए हैं।

​इस छापेमारी ने यह साबित कर दिया है कि तस्करों ने राजधानी के घनी आबादी वाले इलाकों को अपना ‘डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर’ बना रखा है। राजीव कुमार इस नेटवर्क में एक ‘कैरियर’ (माल ढोने वाला) की भूमिका निभा रहा था, जो नालंदा और पटना के बीच नशे की आपूर्ति सुनिश्चित करता था। पुलिस अब उस गोदाम मालिक और मुख्य सरगना की तलाश में जुटी है, जिसने इन प्रतिबंधित दवाओं को भारी मात्रा में स्टॉक कर रखा था।

‘कोडिन इकोनॉमी’: कफ सिरप बना युवाओं का नया नशा (विशेष विश्लेषण)

द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, बिहार में पिछले कुछ वर्षों में कोडिन युक्त कफ सिरप की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।

  1. शराब का विकल्प: शराबबंदी के बाद एक बड़ा वर्ग सस्ते और आसानी से छिपने वाले नशे की तलाश में था। कफ सिरप की बोतलें न केवल ले जाने में आसान हैं, बल्कि इनकी गंध भी शराब की तरह नहीं फैलती, जिससे तस्करों को पुलिस की नजरों से बचने में मदद मिलती है।
  2. अंतर-जिला नेटवर्क: नालंदा के रहने वाले तस्कर का पटना में पकड़ा जाना और पटना सिटी में गोदाम का मिलना यह दर्शाता है कि यह कारोबार अब स्थानीय स्तर से ऊपर उठकर एक ‘सिंडिकेट’ का रूप ले चुका है। इसमें दवा दुकानों और थोक विक्रेताओं की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
  3. स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव: कोडिन एक ओपियेट (Opiate) है, जिसका अधिक मात्रा में सेवन लीवर, किडनी और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जानलेवा साबित होता है। खुसरूपुर पुलिस की यह कार्रवाई न केवल एक अपराध पर रोक है, बल्कि सैकड़ों युवाओं को इस लत के चंगुल में फंसने से बचाने की एक कोशिश भी है।

औषधि विभाग और पुलिस का साझा मोर्चा

​थानाध्यक्ष संजीव सिंह ने बताया कि औषधि विभाग के साथ मिलकर की गई यह कार्रवाई भविष्य के लिए एक ‘ब्लूप्रिंट’ है। चूंकि यह मामला ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और एनडीपीएस (NDPS) एक्ट दोनों के तहत आता है, इसलिए साक्ष्यों का संकलन बहुत महत्वपूर्ण है। जब्त किए गए ऑटो को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है और उसके मालिकाना हक की जांच की जा रही है।

​औषधि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि बरामद किए गए सिरप के बैच नंबरों से यह पता लगाया जा सकता है कि ये दवाइयां किस कंपनी द्वारा निर्मित की गई थीं और किस डिस्ट्रीब्यूटर के माध्यम से इन्हें बाजार में लाया गया। अक्सर तस्कर फर्जी बिलों के सहारे दवाइयों का परिवहन करते हैं, लेकिन खुसरूपुर में हुई यह जब्ती बिना किसी वैध दस्तावेज के की गई थी।

खुसरूपुर: तस्करी का नया ‘ट्रांजिट गेटवे’

​एक तटस्थ दृष्टिकोण से देखें तो खुसरूपुर की भौगोलिक स्थिति इसे तस्करों के लिए मुफीद बनाती है। पटना-बख्तियारपुर फोरलेन का उपयोग कर अपराधी आसानी से सीमावर्ती जिलों जैसे नालंदा, बेगूसराय और बाढ़ तक माल पहुँचा सकते हैं। रविवार की यह कार्रवाई यह भी दर्शाती है कि अगर पुलिस सक्रिय रहे, तो फोरलेन जैसे व्यस्त मार्गों पर भी अपराधियों के हौसले पस्त किए जा सकते हैं। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस को केवल वाहकों (Carriers) तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन ‘सफेदपोश’ चेहरों को भी बेनकाब करना चाहिए जो इस पूरे व्यापार को वित्तपोषित (Finance) करते हैं।

समाधान और सख्त कानून की दरकार

​यह दोपहर खुसरूपुर पुलिस के लिए गौरव का विषय है, लेकिन राजीव कुमार की गिरफ्तारी केवल हिमशैल का सिरा (Tip of the iceberg) है। 2088 बोतलों का मिलना यह संकेत है कि बाजार में ऐसी लाखों बोतलें खपाई जा रही हैं। पुलिस को अब पटना सिटी के उस गोदाम से मिले दस्तावेजों के आधार पर इस पूरे सिंडिकेट के ‘वित्तीय ढांचे’ पर प्रहार करना होगा।

द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस सफल ऑपरेशन के लिए थानाध्यक्ष संजीव सिंह और औषधि विभाग की टीम की सराहना करती है। हमारा मानना है कि जब तक इन दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को जड़ से नहीं काटा जाएगा, तब तक ऐसी गिरफ्तारियां केवल अस्थायी समाधान ही रहेंगी।

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