वैशाली (हाजीपुर), 25 मार्च 2026: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हाजीपुर स्थित खनन विभाग कार्यालय में छापेमारी की। इस दौरान टीम ने एक डेटा एंट्री ऑपरेटर और एक परिचारी (चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी) को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद पूरे कार्यालय में हड़कंप मच गया।
लाइसेंस के नाम पर मांगी जा रही थी घूस
मामला गिट्टी भंडारण लाइसेंस जारी करने से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, बिदुपुर प्रखंड के माइल गांव स्थित एक फर्म ‘मीनाक्षी एंटरप्राइजेज’ ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी फर्म के प्रतिनिधि को दी गई थी।
आरोप है कि खनन विभाग के कर्मियों ने लाइसेंस जारी करने के बदले मोटी रकम की मांग की और बिना घूस के काम नहीं करने की बात कही।
किस्तों में हो रही थी वसूली
शिकायत के अनुसार, शुरुआत में कर्मचारियों ने तत्काल 10 हजार रुपये की मांग की। दबाव में आकर आवेदक पक्ष ने 5 हजार रुपये चालान के नाम पर और 5 हजार रुपये अन्य शुल्क के रूप में जमा कर दिए।
इसके बाद कर्मचारियों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि लाइसेंस जारी करने के लिए कुल 50 हजार रुपये ‘ऑफिस खर्च’ के रूप में देने होंगे, जो कथित तौर पर उच्च स्तर तक पहुंचाए जाते हैं।
निगरानी ने बिछाया जाल, रंगे हाथ पकड़े गए आरोपी
पीड़ित द्वारा निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराने के बाद टीम ने मामले की जांच की और फिर योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की।
जैसे ही तय योजना के तहत केमिकल लगे नोट आरोपियों को दिए गए, टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों को मौके पर ही पकड़ लिया।
गिरफ्तार कर्मियों की पहचान
निगरानी टीम ने जिन दो कर्मियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान इस प्रकार हुई है:
- राहुल कुमार रोशन – डेटा एंट्री ऑपरेटर
- प्रमोद कुमार – परिचारी (चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी)
दोनों आरोपियों से फिलहाल पूछताछ जारी है।
पूछताछ के बाद होगी आगे की कार्रवाई
निगरानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार कर्मियों को हाजीपुर सर्किट हाउस ले जाया गया है, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। पूछताछ पूरी होने के बाद उन्हें पटना स्थित निगरानी की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
कार्रवाई से विभाग में मचा हड़कंप
इस छापेमारी के बाद खनन विभाग में अफरा-तफरी का माहौल है। कई कर्मचारी जांच के दायरे में आ सकते हैं। निगरानी विभाग अब यह भी जांच कर रहा है कि क्या इस पूरे मामले में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल हैं।
भ्रष्टाचार पर सख्ती का संकेत
सरकार की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। लगातार हो रही ऐसी कार्रवाइयों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि आम लोगों को अपने काम के लिए किस तरह अवैध वसूली का सामना करना पड़ता है, लेकिन अब निगरानी एजेंसियों की सक्रियता से ऐसे मामलों पर लगाम लगाने की कोशिश तेज हो गई है।


