
पटना | 31 मार्च 2026: पटना समेत बिहार के शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को और सख्त एवं प्रभावी बनाने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। 1 अप्रैल 2026 से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के नियम पूरी तरह बदल जाएंगे। अब कचरा केवल गीला और सूखा में नहीं, बल्कि चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर देना अनिवार्य होगा। यदि कोई नागरिक या संस्थान ऐसा नहीं करता है, तो सफाईकर्मी कचरा उठाने से इनकार कर सकते हैं।
यह नई व्यवस्था न्यू सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 के तहत लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित करना और पर्यावरण प्रदूषण को कम करना है।
अब चार श्रेणियों में देना होगा कचरा
नई गाइडलाइन के तहत घरों और संस्थानों को अपने कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटना होगा। इसके लिए कचरा उठाने वाली गाड़ियों में चार रंगों के अलग-अलग डस्टबिन लगाए जा रहे हैं, ताकि कचरे का सही तरीके से प्रबंधन किया जा सके।
रंगों के आधार पर कचरे की पहचान इस प्रकार होगी:
- हरा बिन: गीला कचरा — रसोई अपशिष्ट, फल और सब्जियों के छिलके
- नीला बिन: सूखा कचरा — प्लास्टिक, कागज, धातु और कांच
- लाल बिन: सैनिटरी वेस्ट — डायपर, सैनिटरी नैपकिन
- काला बिन: विशेष श्रेणी कचरा — बल्ब, पेंट, दवाइयां, ई-वेस्ट
नगर निगम के अनुसार, यदि घरों से कचरा अलग-अलग नहीं दिया गया तो सफाईकर्मी उसे स्वीकार नहीं करेंगे।
बड़े कचरा उत्पादकों के लिए सख्त नियम
नई व्यवस्था केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं है। 20 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले संस्थान या प्रतिदिन 100 किलो से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले अपार्टमेंट, होटल, सरकारी कार्यालय और अन्य संस्थान अब “थोक कचरा उत्पादक” की श्रेणी में आएंगे।
ऐसे संस्थानों के लिए अपने परिसर में ही गीले कचरे का निस्तारण (ऑन-साइट कंपोस्टिंग) करना अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों का पालन नहीं करने पर “प्रदूषक भुगतान सिद्धांत” के तहत भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
निगरानी के लिए डिजिटल सिस्टम
कचरा प्रबंधन को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एक ऑनलाइन पोर्टल भी विकसित किया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से कचरे के संग्रहण से लेकर निस्तारण तक की पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी।
पटना नगर निगम की तैयारी
नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए पटना नगर निगम ने अपने संसाधनों को भी बढ़ाया है। शहर के छह अंचलों के 375 सेक्टरों में कचरा उठाव को और बेहतर बनाने के लिए कुल 225 नए वाहन खरीदे जा रहे हैं।
इनमें:
- 150 क्लोज टिपर
- 75 ओपन टिपर
शामिल हैं, जिन्हें चार रंगों के डस्टबिन से लैस किया जा रहा है।
वर्तमान में निगम के पास 373 क्लोज टिपर और 150 सीएनजी टिपर हैं, जिनमें से लगभग 327 वाहन सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त शहर की दिशा में पहल
नगर विकास विभाग का मानना है कि यह नई व्यवस्था शहर को साफ-सुथरा रखने के साथ-साथ कचरे के बेहतर और वैज्ञानिक प्रबंधन में मदद करेगी। इससे न केवल लैंडफिल पर दबाव कम होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
पटना में लागू होने जा रही यह नई कचरा प्रबंधन प्रणाली नागरिकों की जिम्मेदारी को बढ़ाने के साथ-साथ शहर को स्वच्छ और स्मार्ट बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब यह नागरिकों और संस्थानों पर निर्भर करेगा कि वे इन नियमों का पालन कर शहर को स्वच्छ बनाए रखने में कितना सहयोग देते हैं।


