बिहार बीजेपी में बड़ा बदलाव, संजय सरावगी बने प्रदेश अध्यक्ष, दिलीप जायसवाल की छुट्टी

बिहार भारतीय जनता पार्टी में बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया गया है। पार्टी ने मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल को पद से हटाते हुए वरिष्ठ नेता और दरभंगा सदर से विधायक संजय सरावगी को बिहार बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस फैसले के साथ ही पार्टी ने आगामी राजनीतिक रणनीति के संकेत भी दे दिए हैं।

मिथिला के कद्दावर नेता हैं संजय सरावगी

संजय सरावगी दरभंगा और पूरे मिथिला क्षेत्र में बीजेपी के एक मजबूत और पुराने चेहरे माने जाते हैं। वह वर्तमान में दरभंगा सदर विधानसभा सीट से लगातार छठी बार विधायक चुने गए हैं। इससे पहले वह नीतीश कुमार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।

वैश्य समुदाय से आने वाले संजय सरावगी की व्यापारी वर्ग में मजबूत पकड़ मानी जाती है। वह दरभंगा शहर के गांधी चौक इलाके के निवासी हैं। उनका जन्म 28 अगस्त 1969 को हुआ था। उनके पिता का नाम परमेश्वर सरावगी है।

शिक्षा और राजनीतिक सफर

संजय सरावगी ने एमकॉम और एमबीए की पढ़ाई की है। छात्र जीवन से ही उनका राजनीति से जुड़ाव रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की।
वर्ष 1995 में उन्होंने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली।

2005 से लगातार विधायक

संजय सरावगी ने वर्ष 2005 में पहली बार दरभंगा सदर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में कदम रखा। इसके बाद

  • मार्च 2005
  • नवंबर 2005
  • 2010
  • 2015
  • 2020
  • 2025

में लगातार इसी सीट से जीत दर्ज की। इसके अलावा वह दरभंगा नगर निगम में वार्ड पार्षद के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

साफ छवि और संगठनात्मक अनुभव

संजय सरावगी की पहचान एक साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में रही है। दरभंगा शहर की जनता के बीच वह एक जाना-पहचाना नाम हैं। वर्ष 2018 में उन्हें बिहार विधानसभा की प्राकलन समिति का अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया था।

हालांकि पिछली सरकार में मंत्री रहने के बाद नई सरकार में उन्हें मंत्री पद नहीं मिल सका था, लेकिन अब पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारी सौंपकर संगठन में उनकी भूमिका को और मजबूत कर दिया है।

संगठनात्मक दृष्टि से अहम फैसला

बीजेपी के अंदरखाने इस फैसले को संगठन को मजबूत करने और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। मिथिला क्षेत्र से प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने आगामी चुनावों को लेकर अपना फोकस भी स्पष्ट कर दिया है।


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