बिहार सरकार ने खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में व्यापक प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कई अधिकारियों का तबादला और नई तैनाती की है। विभाग द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के तहत 19 आपूर्ति निरीक्षकों और 3 प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों को अलग-अलग जिलों और प्रखंडों में पदस्थापित किया गया है। इस फैसले को विभागीय कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
मुख्यालय से फील्ड में भेजे गए अधिकारी
अधिसूचना के अनुसार, पटना मुख्यालय में पदस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे अधिकारियों को अब विभिन्न जिलों के प्रखंड स्तर पर जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार का उद्देश्य जमीनी स्तर पर खाद्य वितरण व्यवस्था को मजबूत करना और निगरानी तंत्र को सक्रिय बनाना है।

प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों की नई तैनाती
तीन प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं:
- मुकेश कुमार विश्वकर्मा – रोह (नवादा)
- मुक्ति कुमार लश्कर – पारू (मुजफ्फरपुर)
- समदर्शी पासवान – पीरो (भोजपुर)
इन अधिकारियों को संबंधित प्रखंडों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
19 आपूर्ति निरीक्षकों का तबादला
विभाग ने बड़े पैमाने पर 19 आपूर्ति निरीक्षकों के भी तबादले किए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
- संतोष कुमार – सिमरी बख्तियारपुर (सहरसा)
- धीरेन्द्र कुमार – मीनापुर (मुजफ्फरपुर)
- प्राणनाथ मुन्ना – गोविंदपुर (नवादा)
- मधु कुमारी – ताजपुर (समस्तीपुर)
- खुशबू कुमारी – पीरपैंती (भागलपुर)
- संजीव कुमार – रघुनाथपुर (सिवान)
अन्य अधिकारियों को भी विभिन्न जिलों में पदस्थापित किया गया है।
तत्काल योगदान के निर्देश
विभाग ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे पटना मुख्यालय से विरमित होते ही अपने नए पदस्थापन स्थल पर तुरंत योगदान दें।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि मुख्यालय में प्रतीक्षा अवधि का बकाया वेतन अब संबंधित नए जिले या प्रखंड से ही दिया जाएगा।
प्रशासनिक मजबूती पर जोर
सरकार का मानना है कि इस तरह के फेरबदल से खाद्य वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
- राशन वितरण की निगरानी मजबूत होगी
- जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान तेजी से होगा
- भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा
आदेश तत्काल प्रभाव से लागू
यह सभी तबादले और नई नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। संबंधित अधिकारियों और जिला प्रशासन को आदेश की प्रतियां भेज दी गई हैं, ताकि निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
कुल मिलाकर, बिहार सरकार का यह कदम प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने और जनकल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।



