‘नल-जल’ में लापरवाही पर बड़ा एक्शन: 2 एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सस्पेंड; जहानाबाद और औरंगाबाद में की थी गड़बड़ी, मंत्री बोले- कोताही बर्दाश्त नहीं

पटना | बिहार सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना ‘हर घर नल का जल’ में पलीता लगाने वाले दो बड़े अधिकारियों पर गाज गिरी है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) ने कार्यपालक अभियंता अमित कुमार और कार्यपालक अभियंता मो. शमी अख्तर को सस्पेंड कर दिया है। विभागीय समीक्षा में पाया गया कि ये अधिकारी जनता की प्यास बुझाने के बजाय फाइलों में ही ‘खेल’ कर रहे थे।

इंजीनियर नंबर 1: अमित कुमार (तत्कालीन जहानाबाद, वर्तमान सासाराम)

​अमित कुमार पर जहानाबाद में तैनाती के दौरान गंभीर आरोप सही पाए गए:

  • फर्जी निपटारा: CGRC पोर्टल पर आई शिकायतों को बिना काम किए ही ‘सॉल्व’ (Resolved) दिखा दिया। जब फीडबैक लिया गया, तो जनता ने पोल खोल दी।
  • लापरवाही: चापाकल मरम्मत और आंगनबाड़ी केंद्रों में पानी पहुंचाने में फेल रहे।
  • अनुशासनहीनता: बैठकों से गायब रहना और स्पष्टीकरण के बाद भी काम में सुधार न करना इन्हें भारी पड़ा।

इंजीनियर नंबर 2: मो. शमी अख्तर (औरंगाबाद)

​औरंगाबाद प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता मो. शमी अख्तर पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप हैं:

  • भुगतान में देरी: नल-जल योजना के मेंटेनेंस (O&M) के पैसों के भुगतान में जानबूझकर देरी की।
  • टेंडर में खेल: निविदा निष्पादन में नियमों की अनदेखी की और वित्तीय अनुशासन तोड़ा।
  • शिकायतें: इनके काम से जनता इतनी परेशान थी कि पोर्टल पर शिकायतें बार-बार ‘Reopen’ हो रही थीं।

मंत्री बोले- यह तो बस शुरुआत है

​लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री श्री संजय कुमार सिंह ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई एक चेतावनी है।

  • ​उन्होंने कहा- “नल-जल योजना सीधे जनता की जिंदगी से जुड़ी है। हमारा मकसद दंड देना नहीं, काम करवाना है। लेकिन, अगर कोई अफसर जनता को पानी पिलाने में कोताही बरतेगा, तो सरकार उसे पानी पिला देगी। यह कार्रवाई अंतिम विकल्प के रूप में की गई है और आगे भी सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

​दोनों अधिकारियों को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत निलंबित किया गया है।

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