
Bihar के भोजपुर जिले में पुलिस विभाग पर रिश्वतखोरी और कर्तव्यहीनता के गंभीर आरोप लगे हैं। बड़हरा प्रखंड अंतर्गत खवासपुर थाना विवादों में घिर गया है, जहां थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मियों पर कथित रूप से 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगा है। मामले में जांच के बाद तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
तीन पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
भोजपुर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-2 Ranjit Kumar Singh ने पूरे मामले की जांच कराई। जांच रिपोर्ट में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद खवासपुर थानाध्यक्ष विधा भूषण, सब-इंस्पेक्टर दिलीप कुमार दिवाकर और पीटीसी रमेश प्रसाद यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
तीनों का मुख्यालय पुलिस केंद्र, आरा निर्धारित किया गया है।
मोबाइल बातचीत को लेकर शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, 22 मई को खवासपुर थाना क्षेत्र के महुली घाट पर एक युवक और युवती के मोबाइल पर बातचीत को लेकर विवाद हुआ था। इस मामले में कृष्णागढ़ थाना क्षेत्र के बिंद टोला निवासी विशाल कुमार समेत तीन युवकों को थाने में बैठाया गया था।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि युवकों को छोड़ने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की गई।
गरीब परिवारों ने लगाया गंभीर आरोप
विशाल कुमार के चाचा सौदागर कुमार बिंद ने बताया कि दोनों परिवार बेहद गरीब हैं और सब्जी बेचकर जीवनयापन करते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों में समझौता हो चुका था, इसके बावजूद थाना स्तर पर दबाव बनाया जा रहा था।
वहीं लड़की पक्ष के पिता अनिल बिंद ने भी पुलिसकर्मियों पर रिश्वत मांगने और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया।
एसडीपीओ ने खुद पहुंचकर की जांच
शिकायत मिलने के बाद एसडीपीओ-2 रंजीत कुमार सिंह स्वयं खवासपुर थाना पहुंचे और दोनों पक्षों से अलग-अलग पूछताछ की।
जांच के दौरान सब-इंस्पेक्टर दिलीप कुमार दिवाकर पर रिश्वत मांगने का आरोप सही पाया गया। साथ ही थाना दैनिकी कई दिनों से लंबित मिली, जिससे पुलिस कार्यप्रणाली में गंभीर लापरवाही उजागर हुई।
भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई
भोजपुर पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश देने की कोशिश की है।
हालांकि इस घटना के बाद थाना स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंचती, तो गरीब परिवारों को न्याय मिलना मुश्किल हो जाता।


