सहरसा | विशेष रिपोर्ट: बिहार के सहरसा जिले में पुलिस विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। कनरिया थाना में पदस्थापित तीन पुलिसकर्मियों को निर्दोष लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाने और प्राथमिकी (FIR) में हेरफेर करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई कोशी क्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) के निर्देश पर की गई है, जब जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।
जनता दरबार की शिकायत बनी कार्रवाई का आधार
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब कोशी क्षेत्र के डीआईजी द्वारा आयोजित जनता दरबार में एक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कनरिया थाना से जुड़े पुलिसकर्मी वर्दी का दबाव बनाकर निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसा रहे हैं।
इस गंभीर शिकायत को देखते हुए मामले की जांच के आदेश दिए गए। जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिससे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया।
जांच में सामने आई FIR में हेरफेर की साजिश
जांच में यह पाया गया कि कनरिया थाना कांड संख्या 13/2026 में कुछ पुलिसकर्मियों ने मिलीभगत कर प्राथमिकी में बदलाव किया। आरोप है कि इस हेरफेर के जरिए निर्दोष व्यक्तियों को जानबूझकर केस में शामिल किया गया।
प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई की गई।
ये पुलिसकर्मी हुए निलंबित
इस मामले में जिन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है, उनमें शामिल हैं:
- पु.अनि. अनिल प्रसाद
- चौकीदार अनिल कुमार
- चौकीदार दर्शन
तीनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए पुलिस केंद्र, सहरसा में स्थानांतरित कर दिया गया है।
विभागीय कार्रवाई भी शुरू
निलंबन के साथ-साथ तीनों आरोपितों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि दोष सिद्ध होने पर आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस विभाग का सख्त संदेश
इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ड्यूटी के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही, कदाचार या सत्ता का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कोशी क्षेत्र के डीआईजी ने सभी पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा कि “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा।
पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई पुलिस विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे यह संदेश जाता है कि कानून के रखवाले अगर नियम तोड़ेंगे, तो उनके खिलाफ भी उतनी ही सख्ती से कार्रवाई होगी।
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