भागलपुर (नाथनगर), 14 जुलाई 2025।नाथनगर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय मथुरापुर में सोमवार को टिफिन के दौरान एक गंभीर लापरवाही सामने आई, जिससे एक मासूम छात्र बुरी तरह झुलस गया। घटना तब हुई जब छठी कक्षा के एक छात्र ने अपने बैग में आम पकाने वाला कार्बेट गैस (जिसे आम बोलचाल में “कार्बन” कहा जाता है) स्कूल में लेकर आया और खेल-खेल में उसमें पानी डालकर माचिस जला दी। इसके बाद तेज धमाके जैसी आवाज हुई और धुएं के साथ निकली गर्म गैस की चपेट में पास खड़ा पहली कक्षा का एक छात्र गंभीर रूप से झुलस गया।
चेहरे और आंख के पास गहरी चोट
प्रत्यक्षदर्शी छात्रों और शिक्षकों के अनुसार, झुलसे छात्र के चेहरे पर जलन के गहरे निशान हैं, वहीं दाहिनी आंख के पास गंभीर चोट आई है। हालांकि, इसके बावजूद विद्यालय प्रशासन ने न तो कोई प्राथमिक चिकित्सा दी और न ही छात्र को अस्पताल पहुंचाया, बल्कि परिजनों को सूचना देकर सीधे मामा के साथ घर भेज दिया गया।
परिजनों ने जताया विरोध
बच्चे के मामा का कहना है कि जब वे घायल छात्र को लेकर शिकायत करने स्कूल पहुंचे तो प्रधानाध्यापक राधे दास ने कहा –
“मैं क्या करूं, आप इसे घर ले जाइए।”
स्कूल प्रशासन की इस प्रतिक्रिया से आहत परिजन और ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई। परिजनों ने छात्र का इलाज निजी स्तर पर कराया, जबकि शिक्षा विभाग या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को घटना की कोई सूचना नहीं दी गई।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि विद्यालय परिसर में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। बच्चों की गतिविधियों पर न निगरानी है, न किसी भी आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सा व्यवस्था। ऐसी घटनाएं इस ओर इशारा करती हैं कि स्कूल प्रशासन आपात निर्णय लेने में पूरी तरह विफल है।
जिम्मेदारी से बचते दिखे प्रधानाध्यापक
घटना को लेकर जब स्कूल के प्रधानाध्यापक राधे दास से पूछा गया तो उन्होंने कहा:
“एक बच्चे के द्वारा ऐसा किया गया है, परिजन इलाज के लिए उसे ले गए हैं। जिसने किया है, उसका पता लगाया जा रहा है।”
उनके इस बयान ने न तो पीड़ित छात्र की स्थिति की गंभीरता को दर्शाया, न ही स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी स्वीकार की गई।
जांच और कार्रवाई की मांग
घटना की कोई आधिकारिक रिपोर्ट न तो जिला शिक्षा कार्यालय को दी गई है, न ही स्वास्थ्य विभाग को। अभिभावकों और ग्रामीणों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी स्कूल प्रशासनिक अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
बड़ा सवाल: कार्बेट स्कूल में कैसे पहुँचा?
घटना के बाद यह भी सवाल उठ रहा है कि ऐसा खतरनाक रसायन छात्र तक कैसे पहुंचा और वह उसे स्कूल तक कैसे ले आया? यदि स्कूल परिसर में बच्चों के बैग की निगरानी या चेकिंग होती, तो शायद यह घटना रोकी जा सकती थी।


