“4 बच्चे पैदा करना पर्सनल च्वाइस”: मैथिली ठाकुर का बयान, पप्पू यादव की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया

बिहार की चर्चित लोकगायिका और अलीनगर की विधायक मैथिली ठाकुर ने हाल ही में दिए गए अपने बयान से राजनीतिक और सामाजिक बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। गया सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने न केवल परिवार और समाज से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी, बल्कि जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव के विवादित बयान पर भी खुलकर प्रतिक्रिया दी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मैथिली ठाकुर ने कहा कि “चार बच्चे पैदा करना किसी का पर्सनल च्वाइस है।” उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आज के समय में लोगों को अपने जीवन से जुड़े फैसले खुद लेने का अधिकार होना चाहिए। उनके मुताबिक, यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है और इसे किसी पर थोपा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज के युवा सबसे ज्यादा इस बात को महत्व देते हैं कि उनके राज्य में विकास हो, रोजगार मिले और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों।

मैथिली ठाकुर ने कहा कि समाज और धर्म की सुरक्षा भी जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करना उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं की सोच का जिक्र करते हुए कहा कि नई पीढ़ी अब पारंपरिक मुद्दों से आगे बढ़कर विकास और अवसरों की बात कर रही है।

इस दौरान जब उनसे पप्पू यादव के उस बयान के बारे में पूछा गया, जिसमें उन्होंने महिला राजनेताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, तो मैथिली ठाकुर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि “यह बयान माफी के लायक भी नहीं है।” उनके अनुसार, इस तरह की भाषा और सोच समाज के लिए बेहद हानिकारक है।

उन्होंने कहा कि “हम जिस परिवार से आते हैं, वहां माहौल और संस्कारों को बहुत महत्व दिया जाता है। मेरे पिता ने मुझे समझकर राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया था।” उन्होंने यह भी कहा कि हर युवा कुछ बड़ा करना चाहता है और उसी सोच के साथ वह राजनीति में आई हैं।

पप्पू यादव के बयान पर नाराजगी जाहिर करते हुए मैथिली ठाकुर ने कहा कि “महिला नेताओं के खिलाफ इस तरह की अभद्र टिप्पणी करना बिल्कुल गलत है। यह सिर्फ किसी एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे समाज की महिलाओं पर आघात है।” उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

मैथिली ठाकुर ने यह भी कहा कि “उन्होंने 90 प्रतिशत महिलाओं पर लांछन लगाया है, जो बिल्कुल अस्वीकार्य है।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी के अपने घर में भी महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में हों, तो इस तरह की टिप्पणी कैसे की जा सकती है।

उन्होंने नारी शक्ति वंदना अधिनियम पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर फिर से चर्चा होनी चाहिए। उनके अनुसार, हाल के बयानों से यह स्पष्ट हो गया है कि कुछ लोगों की मानसिकता अभी भी महिलाओं के प्रति नकारात्मक है। उन्होंने कहा कि इसका राजनीतिक और सामाजिक खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है।

मैथिली ठाकुर ने कहा कि महिलाओं का सम्मान किसी भी समाज की नींव होता है और यदि उस सम्मान को ठेस पहुंचती है, तो उसका असर व्यापक रूप से देखने को मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं अपने तरीके से जवाब देना जानती हैं और समय आने पर वह अपनी शक्ति का प्रदर्शन भी करती हैं।

इसके अलावा, उन्होंने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हालात पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वहां के लोग बदलाव चाहते हैं और भाजपा के प्रति झुकाव भी दिखा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां प्रशासन कमजोर नजर आता है और अपराध के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बंगाल जाने से पहले उन्होंने कई वीडियो देखे, जिसमें हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं दिखाई गई थीं, जिससे उन्हें असहज महसूस हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि वहां की महिलाएं भी मौजूदा व्यवस्था से परेशान हैं और बदलाव की उम्मीद कर रही हैं।

कुल मिलाकर, मैथिली ठाकुर का यह बयान न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता के पक्ष में खड़ा नजर आता है, बल्कि महिलाओं के सम्मान और राजनीतिक मर्यादा की भी वकालत करता है। उनके इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राजनीति में भाषा और आचरण की मर्यादा कितनी जरूरी है।

अब यह देखना होगा कि इस पूरे विवाद पर आगे क्या राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आती हैं और क्या इससे किसी तरह का बदलाव देखने को मिलता है या नहीं।

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