सबौर कृषि विश्वविद्यालय में ‘किसान मेला’ का महाकुंभ! शाहनवाज हुसैन ने किया उद्घाटन; वैज्ञानिकों के ‘ऑर्गेनिक सिंदूर’ ने मोह लिया मन

HIGHLIGHTS

  • भव्य आगाज़: तीन दिवसीय राष्ट्रीय किसान मेले का भागलपुर के सबौर (BAU) में शानदार शुभारंभ।
  • VIP गेस्ट: पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन और कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने संयुक्त रूप से किया उद्घाटन।
  • बड़ा आकर्षण: मेले में जैविक उत्पादों की धूम; ‘पवित्र और शुद्ध’ ऑर्गेनिक सिंदूर बना चर्चा का केंद्र।
  • टेक-टॉक: 3 दिनों तक किसानों को मिलेंगे उन्नत बीज, आधुनिक यंत्र और जीरो-बजट नेचुरल फार्मिंग के गुरुमंत्र।

सबौर (भागलपुर) | 16 मार्च, 2026

​बिहार की कृषि राजधानी कहे जाने वाले बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर के प्रांगण में आज से ‘खेती की नई पटकथा’ लिखी जा रही है। तीन दिवसीय राष्ट्रीय किसान मेले का आज गाजे-बाजे और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उद्घाटन हुआ। यह मेला केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि बिहार के किसानों को ‘अन्नदाता’ से ‘एग्री-बिजनेसमैन’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

शाहनवाज हुसैन का ‘सिंदूर कनेक्शन’: तकनीक और परंपरा का मेल

​उद्घाटन के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और छात्रों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का बारीकी से निरीक्षण किया।

  • ऑर्गेनिक सिंदूर: मेले में सबसे ज्यादा ध्यान विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए जैविक सिंदूर ने खींचा। शाहनवाज हुसैन ने इसमें विशेष रुचि दिखाते हुए कहा, “भारतीय संस्कृति में सिंदूर की पवित्रता सर्वोपरि है। अगर यह पूरी तरह जैविक और शुद्ध है, तो यह हमारी परंपरा और सेहत दोनों के लिए बड़ी उपलब्धि है।”
  • वैज्ञानिक सराहना: उन्होंने कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह की मौजूदगी में कहा कि सबौर विश्वविद्यालय आज कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में देश के मानचित्र पर चमक रहा है।

3 दिन, 300 समाधान: क्या है मेले का खाका?

​इस राष्ट्रीय मेले में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञ किसानों को निम्नलिखित जानकारियां दे रहे हैं:

  1. उन्नत बीज: जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कम पानी में अधिक पैदावार देने वाले बीजों का प्रदर्शन।
  2. स्मार्ट मशीनरी: छोटे किसानों के लिए कम लागत वाले कृषि यंत्र और ड्रोन तकनीक।
  3. एग्रो-बिजनेस: ऑर्गेनिक खेती के जरिए उत्पादों की ब्रांडिंग और सीधे बाजार से जुड़ने के तरीके।
  4. पशुपालन और बागवानी: गव्य विकास और औषधीय पौधों की खेती पर विशेष सत्र।
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