भागलपुर | 26 फरवरी, 2026: उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली लाइफलाइन, विक्रमशिला सेतु, मंगलवार को एक बार फिर यात्रियों के लिए ‘दुःस्वप्न’ साबित हुई। ब्रेकडाउन, मेंटेनेंस और वाहनों की खराबी के एक के बाद एक हुए घटनाक्रमों ने सेतु की यातायात व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया, जिससे करीब 18 घंटे तक हजारों लोग सड़क पर ही कैद रहे。
आधी रात से शुरू हुआ संकट: जब पीलर 27 पर थमी रफ्तार
जाम की शुरुआत मंगलवार तड़के हुई, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया:
- पहला ब्रेकडाउन: रात करीब 2:00 बजे पीलर संख्या 27 के पास नवगछिया की ओर जा रही एक गाड़ी खराब हो गई。
- मानवीय चूक: संकरी लेन में वाहन फंसने के बाद पीछे खड़े कई ट्रक चालक अपनी गाड़ियों में ही सो गए। जब रास्ता साफ हुआ, तो सोए हुए चालकों के कारण घंटों तक ट्रैफिक आगे नहीं बढ़ सका。
- प्रशासनिक मशक्कत: सात थानों की पुलिस और यातायात विभाग ने क्रेन की मदद से सुबह 11:00 बजे जाकर स्थिति को सामान्य किया, लेकिन यह राहत बहुत कम समय की थी。
दोपहर का प्रहार: मेंटेनेंस और पंचर ने बिगाड़े हालात
सुबह की राहत के बाद दोपहर में एक बार फिर संकट खड़ा हो गया:
- मरम्मत कार्य: सेतु पर चल रहे मेंटेनेंस कार्य की वजह से ट्रैफिक रुक-रुक कर चल रहा था。
- शाम का संकट: शाम 4:00 बजे पीलर संख्या 107 के पास एक वाहन पंचर हो गया, जिससे 5 घंटे का नया जाम लग गया。
- इमरजेंसी पर ब्रेक: इस दौरान जीवन रक्षक एंबुलेंस और कई अन्य आपातकालीन वाहन भी घंटों तक जाम में फंसे रहे, जिससे मरीजों की जान पर बन आई。
ग्राउंड जीरो का हाल: जीरो माइल से जाह्नवी चौक तक पैदल यात्रा
जाम का असर केवल सेतु तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे भागलपुर शहर और बायपास को अपनी चपेट में ले लिया:
- किलोमीटर लंबी कतारें: सबौर रोड और बायपास मार्ग पर कई किलोमीटर तक ट्रक और बसें खड़ी रहीं。
- मजबूरी की पैदल यात्रा: स्थिति इतनी भयावह थी कि यात्रियों को जीरो माइल से लेकर नवगछिया के जाह्नवी चौक तक कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा。
- बस सेवा ठप: सिलीगुड़ी और पूर्णिया से आने वाली नाइट बसें, जिन्हें शाम 6 बजे पहुँचना था, वे रात 10 बजे के बाद तिलकामांझी स्टैंड पहुँच सकीं。
VOB का नजरिया: एक पुल, हजार समस्याएं और प्रशासनिक लाचारी
विक्रमशिला सेतु की यह दुर्दशा अब ‘नियमित घटना’ बन चुकी है। एक सिंगल गाड़ी का पंचर होना या ब्रेकडाउन होना पूरे उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी को 18 घंटे के लिए काट देता है, जो प्रशासनिक विफलता का बड़ा उदाहरण है। क्या पुलिस गश्त और क्रेन की उपलब्धता केवल कागजों पर है? जब तक समानांतर पुल (Parallel Bridge) का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक भागलपुर की जनता को ऐसे ‘ट्रैफिक टॉर्चर’ से बचाने के लिए एक ठोस ‘क्विक रिस्पांस टीम’ की जरूरत है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


