पटना | बिहार की शान ‘शाही लीची’ और ‘चाइना लीची’ को कीड़ों से बचाने के लिए सरकार एक्शन में आ गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कृषि विभाग ने कीट प्रबंधन योजना शुरू की है। इसके तहत किसानों को दवा छिड़काव के लिए भारी भरकम सब्सिडी दी जा रही है।
1. समझिए मुनाफे का गणित: एक पेड़ पर कितना मिलेगा?
सरकार ने छिड़काव के लिए दो अलग-अलग रेट तय किए हैं। यह पैसा सीधे आपके खाते में (अनुदान के रूप में) आएगा।
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छिड़काव |
सरकार देगी (प्रति पेड़) |
अधिकतम सीमा |
|---|---|---|
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पहला छिड़काव |
₹162 |
84 पेड़ तक |
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दूसरा छिड़काव |
₹114 |
84 पेड़ तक |
नोट: यानी एक किसान अधिकतम 84 पेड़ों के लिए दोनों बार के छिड़काव का पैसा सरकार से ले सकता है। कुल अनुदान 75 प्रतिशत मिलेगा।
2. फरवरी से अप्रैल: इन 3 दुश्मनों से रहें सावधान
कृषि विभाग ने बताया है कि अभी लीची में मंजर और फल आने का समय है, यही वक्त है जब ये 3 कीड़े सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं:
- दहिया कीट (Mealybug): यह पौधों का रस चूसकर मंजरों को सुखा देता है, जिससे फल गिरने लगते हैं।
- उपाय: पेड़ के तने पर प्लास्टिक की पट्टी लपेटकर ग्रीस लगाएं और बाग की गुड़ाई करें।
- लीची माइट (Mite): यह पत्तियों के नीचे छिपकर रस चूसता है, जिससे पत्तियां मुड़कर ‘सिकुड़ी’ हुई दिखती हैं।
- उपाय: खराब टहनियों को काटकर जला दें और सल्फर या इथियॉन का छिड़काव करें।
- स्टिक बग (Stick Bug): यह फरवरी-अप्रैल में फूलों और फलों को बर्बाद करता है।
- उपाय: 15 दिन के अंतर पर दो बार कीटनाशक छिड़कें।
3. फायदा चाहिए तो यहां करें रजिस्ट्रेशन
इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसान का रजिस्टर्ड होना जरूरी है।
- कहां: कृषि विभाग के DBT पोर्टल (https://dbtagriculture.bihar.gov.in) पर जाकर आवेदन करें।
- क्यों जरूरी: समय पर छिड़काव करने से न सिर्फ फल बचेंगे, बल्कि उनकी क्वालिटी भी अच्छी होगी, जिससे बाजार में दाम बढ़िया मिलेगा।


